कहां समा जाता है कल्याणेश्वर महादेव पर चढ़ाया हुआ जल?

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वैसे तो भारत में हर जगह आपको भगवान शिव के मंदिर मिल जायेंगे, लेकिन कुछ मंदिरों की मेहता ही न्यारी है, इन्ही में से एक है कल्याणेश्वर महादेव मंदिर. कल्याणेश्वर महादेव का मंदिर ‘गढ़मुक्तेश्वर’ के प्रसिद्ध मंदिर ‘मुक्तीश्वर महादेव’ से चार किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में वन क्षेत्र में स्थित है। गढ़ मुक्तेश्वर, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के हापुड़ जिले का शहर एवं तहसील मुख्यालय है।

इसे गढ़वाल राजाओं ने बसाया था। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर गढ़वाल राजाओं की राजधानी था भगवान शिव का यह मंदिर कई रहस्यों को छुपाये हुए है, जिनके कारण इस मंदिर की दूर-दूर तक प्रसिद्धि है। आइये बताते हैं इसके रहस्य के बारे में….

न जाने जल कहां समा जाता है…

दरअसल इस मंदिर में भक्तों द्वारा शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल और दूध भूमि में समा जाता है। न जाने वह जल कहां समा जाता है, इस रहस्य का पता आज तक नहीं चल पाया है। कई बार इस रहस्य को जानने की कोशिश की गयी, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी।

पौराणिक कथा के अनुसार

पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार अपने समय के प्रसिद्ध राजा नल ने यहां शिवलिंग का जलाभिषेक किया था, किन्तु उनके देखते ही देखते शिव पर चढ़ाया जल भूमि में समा गया| यह चमत्कार देखकर राजा नल चौंक गए और उन्होंने इस रहस्य को जानने के लिए बैलगाड़ी से ढुलवा कर हजारों घड़े गंगाजल शिवलिंग पर चढ़ाया।

पर वह सारा जल कहां समाता गया, राजा नल इस रहस्य का पता न लगा पाये। अंत में भगवान शिव से क्षमा मांग कर अपने देश को लौट गए। मराठा छत्रपति शिवाजी ने भी यहां तीन मास तक रुद्रयज्ञ किया था।

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गढ़ मुक्तेश्वर

इस चर्चित पौराणिक और ऐतिहासिक शिव मंदिर के अतिरिक्त गढ़ मुक्तेश्वर भी प्रसिद्ध हैं। शिवपुराण के अनुसार, यहाँ पर अभिशप्त शिवगणों की पिशाच योनि से मुक्ति हुई थी, इसलिए इस तीर्थ का नाम ‘गढ़ मुक्तेश्वर’ अर्थात् ‘गण मुक्तेश्वर (गणों को मुक्त करने वाले ईश्वर) नाम से प्रसिद्ध हुआ।

पौराणिक महत्त्व

भागवत पुराण व महाभारत के अनुसार यह कुरु की राजधानी हस्तिनापुर का भाग था। आज पर्यटकों को यहाँ की ऐतिहासिकता और आध्यात्मिकता के साथ-साथ प्राकृतिक सुन्दरता भी खूब लुभाती है।

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शिव भक्तों की आस्था का केन्द्र

इतना ही नहीं भक्तों की मनोकामना पूर्ति के लिए कल्याणेश्वर महादेव का मंदिर दूर-दूर तक विख्यात है| यह शिव भक्तों की आस्था का केन्द्र होने के कारण यहां भक्तों का आगमन लगा ही रहता है, किन्तु श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि और फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर तो इस मंदिर में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

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