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तालीकोटा था भारतीय इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध

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Written by Afsaana Team

वैसे तो हिंदुस्तान की सरज़मी ने न जाने कितने ही युद्ध और कितने ही रक्तपात देखे और सहे हैं, लेकिन इतिहास के पन्नों में एक युद्ध ऐसा भी है जो भारतीय इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध माना जाता है।

इस युद्ध को ‘राक्षसी तंगड़ी का युद्ध’ और ‘बन्नीहट्टी का युद्ध’ के नाम से भी जाना जाता है। तालीकोटा का युद्ध 25 जनवरी, 1565 ई. को दक्कन की सल्तनतों और विजयनगर साम्राज्य के बीच लड़ा गया, जिसका परिणाम विजयनगर की हार और दक्षिण भारत के अंतिम हिन्दू साम्राज्य का पतन रहा।

ये कहानी है एक बूढ़े राजा की जिसने मरने से पहले अपने महल को मुस्लिम शासक को नहीं सौपा और यही वजह इस राजा की मौत का कारण बनी। हार के बाद में विजय नगर साम्राज्य को बर्बरता पूर्वक लूटा गया। आइये जानते हैं भारतीय इतिहास के सबसे विनाशकारी युद्ध के बारे में।

राक्षस-तांगड़ी का युद्ध

दरअसल विजयनगर साम्राज्य की यह लडाई राक्षस-तांगड़ी नामक गावं के नजदीक लड़ी गयी थी इसलिए इसे राक्षस-तांगड़ी का युद्ध भी कहते हैं। तालीकोटा की लड़ाई के समय, सदाशिव राय विजयनगर साम्राज्य का शासक था, लेकिन वह मात्र एक कठपुतली शासक था। वास्तविक शक्ति तो उसके मंत्री रामराय के पास थी।

सदाशिव राय नें दक्कन की इन सल्तनतों के बीच अंतर पैदा करके उन्हें पूरी तरह से कुचलने की कोशिश की थी। 7 0 वर्षीय राजा रामराय की सेना में दो लाख सिपाही थे और 300 साल तक कोई भी मुस्लिम शासक विजय नगर पर हमला करने की हिम्मत नहीं दिखा पाया था।

रामराय एवं संयुक्त मोर्चे की सेना में भंयकर युद्ध

विजयनगर साम्राज्य के विरोधी महासंघ में अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुण्डा और बीदर शामिल थे। गोलकुण्डा और बरार के मध्य पारस्परिक शत्रुता के कारण बरार इसमें शामिल नहीं था।

इस महासंघ के नेता ‘अली आदिलशाह’ ने रामराय से रायचूर एवं ‘मुद्गल’ के क़िलो को वापस मांगा। रामराय द्वारा मांग ठुकराये जाने पर दक्षिण के सुल्तानों की संयुक्त सेना ‘राक्षसी-तंगड़ी’ की ओर बड़ी, जहाँ पर 25 जनवरी, 1565 को रामराय एवं संयुक्त मोर्चे की सेना में भंयकर युद्ध प्रारम्भ हुआ।

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हुसैन शाह के हाथ मार गया रामराय

पहले तो इस युद्ध के प्रारम्भिक क्षणो में संयुक्त मोर्चा विफल होता हुआ नज़र आया, परन्तु अन्तिम समय में तोपों के प्रयोग द्वारा मुस्लिम संयुक्त सेना ने विजयनगर सेना पर कहर ढा दिया, जिसके परिणामस्वरूप युद्ध क्षेत्र में ही सत्तर वर्षीय रामराय को घेर कर मार दिया गया।

इस युद्ध में रामराय की हत्या हुसैन शाह ने की थी। राजा रामराय की पराजय व उसकी मौत के बाद विजयनगर शहर को निर्मतापूर्वक लूटा गया। इस युद्ध की गणना भारतीय इतिहास के विनाशकारी युद्धो में की जाती है। इस युद्ध को ‘बन्नीहट्टी के युद्ध’ के नाम से भी जाना जाता है।

विजयनगर साम्राज्य पर बोल दिया हमला

हालाकि बाद में इन सल्तनतों को विजयनगर के इस मंसूबे के बारे में पता चल गया था और उन्होंने एकजुट होकर एक गठबंधन का निर्माण किया। और विजयनगर साम्राज्य पर हमला बोल दिया। दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर की राजधानी में प्रवेश करके उनको बुरी तरह से लूटा और सब कुछ नष्ट कर दिया।

इसलिए हुयी विजयनगर की हार

माना जाता है कि दक्कन की सल्तनतों की तुलना में विजयनगर की सेना में घुड़सवार सेना की संख्या कम थी, अतः विजयनगर की सेना को पराजय का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं दक्कन की सल्तनतों की तुलना में विजयनगर की सेना में जो भी हथियार इस्तेमाल किये जा रहे थे वे अधिक पुरानी तकनीक पर आधारित थे।

वहीं दक्कन की सल्तनतों के तोपखाने युद्ध में बेहतर थे। विजयनगर की हार का सबसे बड़ा कारण गिलानी भाइयों का विश्वासघात था जिसके कारण विजयनगर की सेना को पराजय का सामना करना पड़।

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ये हुए तालीकोटा युद्ध के परिणाम

तालीकोटा की लड़ाई के पश्चात् दक्षिण भारतीय राजनीति में विजयनगर राज्य की प्रमुखता समाप्त हो गयी, लेकिन दक्कन की इन सल्तनतों नें विजयनगर की इस पराजय का लाभ नहीं उठाया और पुनः पहले की तरह एक दुसरे से लड़ने में व्यस्त हो गए और अंततः मुगलों के आक्रमण के शिकार हुए।

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