जब भालुओं के गढ़ में हुआ मौत से सामना

भालू की कहानी,मौत क्या है

आपको याद होगा बचपन में हम सबने एक कहानी पढ़ी थी द नैरो एस्केप। ऐसी ही एक घटना सियाटल में रहने वाले टॉड ओर्र के साथ घटी। टॉड को को हाईकिंग का बेहद शौक है। टॉड ओर्र ने अपने साथ रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का ज़िक्र किया था।

दक्षिण-पश्चिमी मोंटाना यानी भालुओं का गढ़

बात पहली अक्टूबर 2016 की है। उस दिन मौसम काफी सुहावना था तो टॉड ओर्र ने सोचा की क्यूँ न इस मौसम में हाईकिंग का लुत्फ़ उठाया जाये। बस यही सोचकर उन्होंने अपनी ज़रुरत का सामान उठाया और चल दिया मेडिसन घाटी की ओर। दक्षिणी-पश्चिमी मोंटाना भालुओं का गढ़ माना जाता है और इस बात की जानकारी टॉड को भी थी।

हर 30 सेकंड में उन्हें कोई न कोई भालू अवश्य नज़र आ ही जाता था और वेह उन्हें देखकर थोड़े रोमांचित हो उठते थे। वह धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे। लगभग तीन मील अन्दर जाने पर वह एक घास के मैदान पर पहुँच गए। वेह थोडा आगे ही बढे थे कि मैदान के एक कोने पर उन्हें मादा भालू अपने बच्चों के साथ नज़र आई।

जैसे ही उसे भालू ने टॉड को देखा तो वह उनसे विपरीत दिशा में भाग खड़ी हुई। लेकिन तभी अचानक वह वापस मुड़ी और टॉड की तरफ दौड़ने लगी। टॉड को लगा की उत्साहित होने के कारण वह ज्यादा तेज़ चीख उठे थे शायद इसलिए मादा भालू ने उनकी तरफ रुख किया है और वह थोड़ी देर में वापस लौट जाएगी।

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मादा भालू का हमला

लेकिन टॉड शायद इतने भाग्यशाली नहीं थे कुछ ही सेकंड्स में मादा भालू उनके एकदम करीब है। वेह तुरंत ही पेट के बल ज़मीन पर लतरे गए और अपनी गर्दन को अपने हाथों से जकड लिया जिससे वह भालू के हमले से थोडा बच सकें।

लेकिन शायद मादा भालू को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वेह टॉड के ऊपर थी और उनके हाथों को कन्धों और पीठ पर काट रही थी या कहिये चबाने की कोशिश कर रही थी। टॉड बताते हैं की वेह काटने के बाद कुछ सेकंड्स रूकती और फिर काटना शुरू कर देती। कुच्छ मिनट के बाद अचानक ही वह भालू उठी और वहां से चली गयी। टॉड उसकी इस हरकत से हैरान थे।

ज़ख़्मी हालत में नीचे उतरने लगे टॉड

भालू के जाने के बाद टॉड ने खुद को धीरे से वहां से समेटा और भगवान का शुक्रिया अदा किया। उन्हें इस बात का एहसास था की वह जिंदा है इसलिए टॉड ने घाटी से नीचे उतरने का फैसला किया। टॉड ने एक नज़र अपने ज़ख्मों पर डाली। उनके हाथों और कन्धों पर काफी गहरे घाव थे और उनमे से लगातार खून बह रहा था। लेकिन वह खुश थे क्यूंकि वो जिंदा वापस लौट रहे थे। टॉड जल्द से जल्द वापस जाना चाहते थे इसलिए उन्होंने सोचा की घाव पर मरहम लगाने के लिए रुकना ठीक नहीं है।

जंगली भालू से दोबारा सामना

घाटी से नीचे उतरने के दौरान करीब 5 से 10 मिनट के बीच टॉड को अचानक भालू के गुर्राने की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने इस बात का एहसास हुआ की या तो वह जंगली भालू उनका पीछा करके वहां तक पहुंची है या फिर घाटी में नीचे उतरने के दौरान वह ऐसे ही उनके बगल में पहुँच गयी थी। जो भी हो लेकिन समस्या यह थी टॉड पर जंगली भालू ने दोबारा हमला कर दिया था। टॉड को यह सब अविश्वसनीय लग रहा था। टॉड सोच रहे थे की उनके साथ ही ऐसा क्यूँ हो रहा है। टॉड को लगा की थोड़ी देर पहले वह भालू के पहले हमले से बचने पर भगवान को शुक्रिया अदा कर रहे थे पर क्या अब वह इस मादा जंगली भालू के दोबारा किये गए हमले से बच पाएंगे।

मौत थी सामने

टॉड को इस समय ऐसा महसूस हो रहा था कि मौत उनकी आँखों के सामने है और कोई करिश्मा ही उन्हें इससे बचा सकता है। टॉड अब दोबारा अपने हाथों से अपनी गर्दन का बचाव करने में लगे हुए थे। और उन्होंने अपना चेहरा ज़मीन पर धंसा रखा था जिससे वेह अपनी आँखों और चेहरे को बचने की कोशिश कर रहे थे। जंगली भालू टॉड के ऊपर चढ़ चुकी थी और उनके कन्धों और हाथों को दोबारा शिकार बना रही थी।

भालू ने फोरआर्म को मुंह में पकड़कर जैसे चबाया टॉड को हड्डी टूटने जैसी आवाज़ सुनाई दी। टॉड का हाथ सुन्न पड़ चूका था और उनकी उँगलियों ने काम करना बंद कर दिया था। टॉड के लिए यह दर्द असहनीय था और उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। जंगली भालू अपने नुकीले दांतों से टॉड के कन्धों और पीठ के ऊपरी हिस्से पर लगातार हमला कर रही थी।

बिना हिले-डुले शांत पड़े रहे

टॉड जानते थे की अगर वह उस स्थिति में ज़रा भी हिले तो उन्हें अपनी जान से आहत धोना पड़ सकता है, इसलिए वह बिना किसी आवाज़ के शांत अवस्था में वहां पड़े रहे।उसने उनके सर और कान पर भी हमला किया और खून बहता हुआ उनके चेहरे पर आने लगा, टॉड तब भी नहीं हिले। उन्हें लगा की अगर भालू ने उनकी गर्दन पर हमला कर दिया तो इस घाटी में ही उनकी मौत हो जाएगी।

तभी अचानक भालू ने हमला करना बंद कर दिया और वह उनके ऊपर कड़ी हो गयी। चारो तरफ सन्नाटा था, टॉड को भालू के हांफने और गहरी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। टॉड उसकी सांसो को अपनी गर्दन पर महसूस कर रहे थे। टॉड को महसूस हो रहा था कि वह अपने आगे के पंजो से पीठ के निचले हिस्से पर रगड़ रही थी।

लगभग 30 सेकेन्ड तक जंगली भालू बेदर्दी से टॉड को मसलती रही। टॉड का चेरा बुरी तरह से ज़मीन में धंसा जा रहा था। टॉड को लग रहा था कि अब वह फिर से उनको काटेगी इसलिए वह नहीं हिले लेकिन यह क्या वह मादा जंगली भालू उन्हें ऐसे ही छोड़कर जा चुकी थी।

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मौत को दी शिकस्त

टॉड ने देखने की कोशिश की लेकिन उनकी आँखों पर खून था इसलिए उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। टॉड सोच रहे थी की अगर उस जंगली भालू ने उन पर तीसरी बार हमला किया तो इस बार उनकी मौत पक्की है। इसलिए उन्हें कुछ करना चाहिए। इस बार उन्होंने अपनी जैकेट में छिपा रखी पिस्तौल निकालने की कोशिश की, उन्होंने सोचा कम से कम वह अपना बचाव तो कर सकते हैं। लेकिन पिस्तौल उनके पास नहीं थी। शायद भागाभागी में कहीं गिर गयी थी।

टॉड ने अपनी आँखों पर से खून साफ़ किया और चारो तरफ नज़र दौड़ाई अब उन्हें जंगली भालू कहीं नज़र नहीं आ रही थी। टॉड के बैकपैक ने उनकी पीठ पर ज्यादा गंभीर घाव होने से बचा लिया था। उन्होंने सारा सामान समेटा और घटी ने नीचे उतरने लगे। टॉड के शरीर से खून बह रहा था उन्हें लगा की अगर वेह अगले ४५ मिनट में गाडी तक नहीं पहुंचे तो कुछ भी हो सकता है।

नीचे उतारते ही उन्होने रास्ते पर आ रही दूसरी गाडी को रोका क्यूंकि वह खुद गाडी चलाने की स्थिति में नहीं थे। और इसके बाद उन्होंने अस्पताल में फ़ोन मिलाया। वहां डॉक्टर्स ने एक्सरे करके बताया की टॉड फोरार्म की अल्ना बोन अलग हो गयी है। डॉक्टर्स को टॉड के पीठ और अन्य जगह पर टांके लगाने में पूरे आठ घंटे लगे। टॉड के सर पर भी पांच इंच गहरा घाव था। टॉड के पूरे शरीर में जंगली भालू के जबड़ों और पंजो के ही निशान दिखाई दे रहे थे। चेहरे पर भी ज़मीन की रगड़ के निशाँ थे।

टॉड आज भी उस घटना को याद करके सिहर उठते हैं और कहते हैं की 1 अक्टूबर का दिन मेरे लिए अच्छा नहीं था लेकिन इश्वर की कृपा थी जंगली भालू के दो बार किये गए खतरनाक हमले के बाद भी मैं जिंदा हूँ और मैंने मौत को शिकस्त दी।

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