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एक ऐसा महान योद्धा जिसने कभी किसी के आगे नहीं झुकाया सिर

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Written by Rahul Ashiwal

महाराणा प्रताप के शोर्य के बारे में तो सुना होगा, लेकिन उनके पारिवारिक जीवन के बारे में कितना जानते हो? आज हम आपको बताएँगे राणा प्रताप के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने और रोचक पहलु।

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास का एक ऐसा योद्धा जिसके सामने मुग़ल सेना के पसीने छूट जाते थे। एक ऐसा राजा जो अपने जीवनकाल में कभी भी किसी के सामने नही झुका, एक ऐसा योद्धा जिसके शोर्य और वीरता के किस्से सुन आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जिसकी वीरता के किस्से सदियों के बाद भी लोगों की जुबान पर आज भी हैं। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के महान शाशक राजस्थान की वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की। उनकी वीरता और दृढ़ संकल्प के कारण उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर है। महाराणा प्रताप कई वर्षों तक मुग़ल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया और उन्हें कई बार युद्ध मैं भी हराया। वे बचपन से ही शूरवीर, निडर, स्वाभिमानी और स्वतंत्रता प्रिय थे।

अपने जीवनकाल में की थी 11 शादियां

महाराणा प्रताप को बचपन में कीका कह कर बुलाया जाता था। प्रताप इनका और राणा उदय सिंह के पिता का नाम था। उनका पूरा नाम महाराणा प्रताप सिंह है। उनका जन्म स्थान कुम्भलगढ़ दुर्ग में 9 मई 1540 को पिता राणा उदय सिंह और माता महाराणी जयवंता कँवर के घर में हुआ। उन्होंने अपने जीवन काल में कुल 11 शादियाँ की थी और 19 पुत्र तथा पुत्रियां थी।

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जितना वजन अकबर में था उससे कही ज्यादा वजन उनके अस्त्र-शस्त्र का था

कहा जाता है महाराणा प्रताप का वजन का वजन 110 किलो और लंबाई 7 फुट 5 इंच थी। और ये भी कहा जाता है कि जितने किलो का अकबर था उतने वजन का तो राणा का भाला हुआ करता था। राणा के भाले का वजन 81 किलो का और छाती का कवच 72 किलो का था। राणा के भाले, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारो का वजन कुल मिलाकर 208 किलो था। राणा दो तलवार इसलिए साथ लेकर घूमते थे क्योंकि यदि कोई निहत्था दुश्मन उनके सामने आये तो एक तलवार उसे दे कर उनका सामना करे। और इनकी दोनों तलवारे और बाकी सामान आज भी उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित है।

कभी किसी के आगे झुकना नही था मंजूर

महाराणा प्रताप अपने उसूलो के बहुत पक्के थे। किसी के आगे झुकना उन्हें बिलकुल भी मंजूर नही था। एक बार अकबर ने राणा प्रताप को कहा था कि अगर तुम हमारे आगे झुकते हो तो आधा भारत आपके हवाले कर दिया जायगा, लेकिन यह सुनकर महाराणा प्रताप ने कहा कि मरना मंजूर है, लेकिन मुगलो के आगे कभी सर नही झुकाऊँगा। अकबर का भी यह मानना था कि महाराणा प्रताप अगर मेरे साथ होते तो शायद हम विश्व विजेता होते।

राणा के घोड़े चेतक ने बचाई उनकी जान

भारतीय इतिहास में जितनी महाराणा प्रताप की बहादुरी की चर्चा है, उतनी ही प्रशंसा उनके घोड़े चेतक को भी मिली। प्रताप के पास एक घोडा था जिसे चेतक के नाम से आज भी जाना जाता है। चेतक महाराणा प्रताप का सबसे प्यारा और प्रसिद्ध घोडा था। उसने हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान अपने प्राणों को खो कर बुद्धिमानी, निडरता, स्वामिभक्ति और वीरता का परिचय दिया। प्रताप का घोडा चेतक हवा से बाते करता था। युद्ध के दौरान मुगलो को पीछे आता देख उसने एक हाथी के सर पर पैर रख दिया था और घायल राणा को लेकर 26 फ़ीट लंबे नाले के ऊपर से कूद गया था। प्रताप के घोड़े चेतक के सिर पर हाथी का मुखोटा लगाया जाता था ताकि दूसरी सेना दुविधा में रहे।

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आखिरकार कैसे हुई राणा प्रताप की मौत

स्वतंत्रता प्रेमी होने के कारण उन्होंने अकबर के अधीनता को पूरी तरीके से अस्वीकार कर दिया। 30 साल प्रयास के बाद भी अकबर प्रताप को बंदी नही बना पाया और एक दिन धनुष पर प्रत्यंचा चढाते वक़्त अचानक प्रत्यंचा बाण से निकल कर राणा के पैर पर लगी, जिसके कारण उनके पैर पर घाव बन गया और धीरे-धीरे वह घाव इतना बढ़ गया कि उनकी मृत्यु हो गयी।

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