न आकार न प्रकार ऐसा है महादेव के चमत्कारों का संसार

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भगवान शिव सबकी आस्था का प्रतीक हैं. पूरे भारतवर्ष में भगवन शिव के कई मंदिर हैं और उन सब से कोई न कोई किवदंती जुड़ी हुई है.  आज हम आपको शिव शम्भू के कुछ ऐसे दुर्लभ मंदिरों के बारे में बताएंगे जिसके चमत्कार  के किस्से दूर दूर तक फैले हैं.

बाणेश्वर मंदिर, कानपुर देहात

कानपुर देहात में एक छोटा सा गाँव है बनिपारा. इस बनिपारा गाँव में महाभारत कालीन एक चमत्कारी शिव मंदिर है. इस मंदिर को बाणेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हुयी हैं. मंदिर के पुजारी चतुर्भुज त्रिपाठी जी बताते हैं कि राजा बाणेश्वर की बेटी ऊषा भगवान शिव की अनन्य भक्त थी. उनकी पूजा करने वह इतनी तल्लीन हो जाती थी कि अपना सब कुछ भूलकर आधी-आधी रात तक दासियों के साथ शिव का जाप करती थी. बेटी की भक्ति को देखकर राजा शिवलिंग को महल में ही लाना चाहते थे ताकि उनकी बेटी को जगंल में न जाना पड़े और उसकी और उसकी पूजा आराधना महल में ही चलती रहे. राजा बाणेश्वर ने इसके लिए घोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी उन्हें दर्शन दिए और उनकी इच्छा जानकर कहा की तुम इस शिवलिंग को यहाँ से ले जा सकते हो लेकिन इसकी स्थापना वही हो जाएगी जहाँ इसे रखा जायेगा. शिवलिंग पाकर प्रसन्न राजा बाणेश्वर तुरंत अपने राजमहल की ओर चल पड़े. रास्ते में ही राजा को लघुशंका के लिए रुकना पड़ा, उन्हें जंगल में एक आदमी आता दिखाई दिया. राजा ने उसे शिवलिंग पकड़ने के लिए कहा और जमीन पर न रखने की बात कहीं.उस आदमी ने शिवलिंग पकड़ तो लिया, लेकिन वह इतना भारी हो गया कि उसे शिवलिंग को जमीन पर रखना पड़ा.अंततः राजा को हार माननी पड़ी और वहीं पर मंदिर का निर्माण कराना पड़ा, जो आज भी बाणेश्वर के नाम से मशहूर है.

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क्या है मान्यता गाँव में आने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार ऐसी मान्यता है की बाणेश्वर मंदिर के शिवलिंग को घेरे में लेने पर हर बार इसका आकर कम और ज्यादा होता है. इसके अलावा यह मान्यता भी है कि सदियों से भोर के समय शिवलिंग पर पुष्प, चावल और जल खुद-ब-खुद चढ़ जाता है. कहा जाता है कि राजकुमारी उषा आज भी सबसे पहले आकर यहां शिवजी की पूजा करती हैं. नागपंचमी के दिन यहां एक बड़े मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर के कांवाड़ियों की भीड़ जुटती है.

नागेश्वर महादेव मंदिर, बड़ोदरा

नागेश्वर महादेव मंदिर बड़ोदरा से चालीस मील दूर स्थित है. यह मंदिर अरब सागर के ठीक सामने और समुद्र के बीचों बीच बना हुआ है. यह मंदिर और मंदिरों की तरह पूरी तरह नज़र नहीं आता है. इसका दर्शन समुद्र में आ रहे ज्वार पर निर्भर करता है.

श्रद्धालुओं को इस मंदिर के दर्शन तभी होते हैं जब समुद्र का ज्वार कम हो जाता है. अगर मौका मिले तो एक बार ज़रूर जाइये ऐसे दुर्लभ नागेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने.

अचलेश्वर महादेव मंदिर, राजस्थान

धौलपुर जिले में राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थापित अचलेश्वर महादेव के शिवलिंग की भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है. इस प्रसिद्ध शिवलिंग के बारे में ऐसा माना जाता है कि यह शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है और इस शिवलिंग का कोई अंत नहीं है. इस शिवलिंग का रंग सुबह के समय लाल, दोपहर को केसरिया और रात को श्याम वर्ण का हो जाता है. वैज्ञानिकों ने भी इस शिवलिंग के रंग बदलने के रहस्य का पता लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन विज्ञान भी यहां होने वाले चमत्कार के आगे हार गया। कई लोगों ने इस शिवलिंग का अंत जानने के लिए खुदाई भी की, लेकिन इससे उन्हें कोई भी सफलता प्राप्त न हुई.

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स्थापना की जानकारी नहीं है

माना जाता है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है. धौलपुर में इसकी स्थापना के बारे में जब जानकारी इकट्ठी करनी चाही तब कुछ ज्ञात नहीं हुआ. यहाँ इस बारें में किसी को नहीं पता कि आखिर यह मंदिर कैसे, कब स्थापित किया गया. लेकिन यहां रोजाना शिवलिंग के दर्शन के लिए सैकड़ो भक्तों की भीड़ लगती है.

केवल उपरोक्त ही नहीं ऐसे न जाने कितने दुर्लभ शिव मंदिर इस भारतवर्ष में स्थित है. उनकी जानकारी फिर कभी.

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