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‘भगवान का अपना बगीचा’ कहा जाने वाला एशिया का सबसे स्वच्छ गांव

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Written by Rahul Ashiwal

देखा जाए तो भारत में ‘स्वच्छ भारत अभियान’  जोर शोर से चल रहा है, लेकिन आज भी सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गांवो, कस्बों और शहरों की हालत बहुत खराब है, लेकिन इन सबके बावजूद एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव भी हमारे देश भारत में ही है। यह खूबसूरत गांव है मेघालय का ‘मावल्यान्नॉंग’ गांव जिसे कि ‘भगवान का अपना बगीचा’ भी कहा जाता है। स्वच्छता के साथ-साथ ये गांव देखने में भी बेहद खूबसूरत है।

साफ-सुथरे ही नहीं साक्षर भी हैं यहां के लोग

आपको बता दें कि सफाई के साथ-साथ यह गांव शिक्षा में भी अव्वल है। यहां की साक्षरता दर 100 फीसदी है। इतना ही नहीं, इस गांव में ज्यादातर लोग सिर्फ़ अंग्रेजी में ही बात करते हैं। इस गांव को साफ रखने में यहां के लोगों की सबसे बड़ी भूमिका है। इस गांव के लोग सफाई के प्रति जागरूक हैं।

मेघालय का मावल्यान्नॉंग गांव

पूरे एशिया में सफाई के मामले में अव्वल ‘खासी हिल्स’ डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। यहां लगभग 95 परिवार रहते हैं। इस गांव के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन सुपारी की खेती है। यहां लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करते हैं। इससे कचरा भी नहीं फैलता और इन्हें खाद भी प्राप्त हो जाती है।

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एशिया का सबसे साफ गांव

मावल्यान्नॉंग 2003 में एशिया का सबसे साफ और 2005 में भारत का सबसे साफ गांव बना। आपको बता दें  इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है की यहां की सारी सफाई यहां के ग्रामवासी स्वयं करते है, सफाई व्यवस्था के लिए वो किसी भी तरह प्रशासन पर आश्रित नहीं है। किसी भी ग्रामवासी को फिर चाहें वो महिला हो, पुरुष हो या बच्चे हो जहां गन्दगी नज़र आती है तो वे सफाई पर लग जाते है। इस तरह ये पूरा गांव साफ रहता है।

इन लोगों की सफाई के प्रति जागरूकता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यदि सड़क पर चलते हुए किसी ग्रामवासी को कोई कचरा नज़र आता है तो वो रूककर पहले उसे उठाकर डस्टबिन में डालेगा फिर आगे जाएगा। ये भावना ही इन्हें सफाई के मामले में अव्वल बनाती है।

इस गांव में हैं कई अमेंजिग स्पॉट

इतना ही नहीं इस गांव में टूरिस्ट्स के लिए भी कई अमेंजिग स्पॉट हैं, जैसे वाटरफॉल, लिविंग रूट ब्रिज (पेड़ों की जड़ों से बने ब्रिज) और बैलेंसिंग रॉक्स भी हैं। इसके अलावा जो एक और बहुत फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन है वो है 80 फीट ऊंची मचान पर बैठ कर शिलांग की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारना। ये गांव अपने आप में बेहद खूबसूरत है।

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विशाल पेड़ों की जड़ों से बने प्राकृतिक पुल

इस तरह के ब्रिज पूरे विश्व में केवल मेघालय में ही मिलते हैं। पेड़ों की जड़ों से बने प्राकृतिक पुल जो समय के साथ-साथ मज़बूत होते जाते हैं।  कई जगह आने वाले प्रयटकों की जलपान सुविधा के लिए ठेठ ग्रामीण परिवेश की टी स्टाल बनी हुई है जहां आप चाय का आनंद ले सकते हैं इसके अलावा एक रेस्टोरेंट भी है जहां आप भोजन कर सकते है। कभी अपने पास के कचरे से परेशान है जाए तो एक बार यहां की सैर अवश्य करें।

पिछले ही साल प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ ने भी इस गांव को दौरा किया। इस गांव में स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े कई लोगों को प्रधानमंत्री  ने उनके सराहनीय काम के लिए सम्मानित भी किया।

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