आखिर क्यों रैडक्लिफ़ ने कर दिए हिन्दुस्तान विभाजन से जुड़े सभी कागज़ात नष्ट?

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सीरिल रैडक्लिफ़ जिन्होंने खिंची भारत और  पकिस्तान के बीच सीमा रेखा

वैसे तो भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग करने और इनके बीच सीमा रेखा कींचने में न जाने कितने ही लोगों का हाथ था, लेकिन इसमें जो सबसे अहम किरदार निभाया, जिसने इस रेखा को मुर्त रूप देकर इन इसे सीमा रेखा को बॉर्डर बना दिया वो कोई भारतीय या पाकिस्तानी नहीं था बल्कि एक ब्रिटिश था। हम आज के अफसाने में आपको इतिहास के पन्नों से  भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण करने वाले उस शख्स के बारे में बात करेंगे और सुनाएंगे कुछ रोचक तत्कालिन किस्से…

किसने किया भारत-पाकिस्तान सीमा रेखा का निर्धरण

आपको बता दें सीरिल रैडक्लिफ़ एक ब्रिटिश वकील थे, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन की रेखा तैयार की थी और उन्हीं के नाम पर इस रेखा को  रैडक्लिफ़ रेखा कहा जाता है। रैडक्लिफ़ रेखा 17 अगस्त 1947 को भारत विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच खींची गई, जिसने 88 करोड़ लोगों और 1,75,000-वर्ग-मील (4,50,000 कि.मी.) क्षेत्र को दो भागों में  विभाजित कर दिया।

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सिर्फ 5 सप्ताह में करना था विभाजन

नियुक्ति के बाद 8 जुलाई को भारत में पहुंचने पर, रैडक्लिफ़ को सीमा के बारे में फैसला करने के लिए मात्र 5 सप्ताह दिए गए। बिना समय गवाएं जल्द ही उन्होंने अपने कॉलेज के भूतपूर्व छात्र माउंटबेटन के साथ मुलाकात की और आयोग के सदस्यों जिनमें मुख्यत: कांग्रेस से नेहरू और मुस्लिम लीग के अध्यक्ष जिन्ना से मिलने के लिए लाहौर और कलकत्ता की यात्रा के लिए निकल पड़े।

बंगाल का भी हुआ विभाजन

इतिहास पर नजर डाले तो इस विभाजन में न केवल भारत के दो टुकड़े किये गये बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया और बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) बना दिया गया। वहीं पंजाब का विभाजन कर पाकिस्तान का निर्माण हुआ। इस विभाजन में रेलवे, फौज, ऐतिहासिक धरोहर, केंद्रीय राजस्व, सबका बराबरी से बंटवारा किया गया।

रैडक्लिफ़ ने सभी मुश्किल निर्णय स्वयं लिए

यह बंटवारा आसान नहीं था, लेकिन रैडक्लिफ़ ने सभी मुश्किल निर्णय स्वयं लिए। यह शुरूआत से ही असंभव था, लेकिन लगता है रैडक्लिफ़ को खुद पर कोई संदेह नहीं था और हालातों को बदलने के लिए कोई आधिकारिक शिकायत या प्रस्ताव नहीं उठाया। इतना ही नहीं निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए, रैडक्लिफ़ ने वायसराय माउंटबेटन से भी अपनी दूरी बनाए रखी।

हुआ पाकिस्तान का जन्म

भारत से अलग होकर एक मुस्लिम राष्ट्र बना पाकिस्तान, यह  मुसलमानों की मातृभूमि के रूप में था, जबकि भारत हिन्दू बहुमत के साथ एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र था। उत्तर में मुसलमान बहुल क्षेत्र पाकिस्तान बनने वाले थे। बलूचिस्तान के प्रांत (विभाजन से पहले 91.8% मुसलमान) और सिंध (72.7%) पूरी तरह पाकिस्तान को सौंप दिए गए।

विभाजन गुप्त रूप से किया गया

विवादों और देरी से बचने के लिए विभाजन गुप्त रूप से किया गया था। अंतिम अधिनिर्णय 9 अगस्त और 12 अगस्त को तैयार थे, लेकिन विभाजन के दो दिन बाद तक प्रकाशित नहीं किए गए। ये निर्णय कैसे लिए गए इस बात की सच्चाई कभी ज्ञात नहीं होगी, क्योंकि रैडक्लिफ़ ने सारे अभिलेख नष्ट कर दिए और माउंटबेटन ने स्पष्ट रूप से किसी विशेष जानकारी या पक्षपात से इनकार कर दिया।

दंगे भड़कने का डर

रैडक्लिफ़ स्वतंत्रता दिवस पर ही चले गए, इससे पहले कि सीमा अधिनिर्णय वितरित किए जाते क्योंकि वे ये बात जानते थे कि भले ही वे कुछ भी करते, लोगों को तो भुगतना ही पड़ता। इस औचित्य के पीछे कि आखिर वे निर्णय वितरित  होने से पहले ही क्यों चले गए, ये सोच कभी प्रकट नहीं होगी क्योंकि रैडक्लिफ़ ने “अपने भारत छोड़ने से पहले सभी कागज़ात नष्ट कर दिए”

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हुआ वही जिसका सभी को डर था

लेकिन अंततः हुआ वही जिसका सभी को डर था, सीमा संघर्षों की वजह से 1947, 1965 और 1971 में तीन युद्ध हुए, साथ ही मई 1998 में दोहरे परमाणु हथियारों के परीक्षण और 1999 का कारगिल संघर्ष सामने आया। इतना ही नहीं आज तक भी दोनों देशे के बीच मतभेद न केवल बने हुए हैं बल्कि और ज्याद बढ़ते ही जा रहे हैं। रैडक्लिफ़ ने सीमा का निर्धारण कर अपने काम कर दिया, लेकिन ये दोनों देश आज भी विभाजन का दर्द झेल रहें हैं।

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