वो बंगला जिसमे रखी गयी थी विभाजन की नींव

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भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद मोहम्मद अली जिन्ना तो पाकिस्तान चले गए लेकिन भारत की आर्थिक राजधानी में जिन्ना हाउस आज भी विराजमान है. लेकिन मुंबई की एक बड़ी रीयल एस्टेट डेवलपर कंपनी के प्रवर्तक और विधायक मंगल प्रभात लोढा ने विधानसभा में जिन्ना हाउस को ढहाने की मांग की और वहां पर सांस्कृतिक केंद्र बनाने की के लिए कहा. तो चलिए आज आपको जिन्ना हाउस की सैर कराते हैं.

कहाँ है जिन्ना हाउस

जिन्ना हाउस दक्षिणी मुंबई के मालाबार हिल इलाके में स्थित है. यह बंगला ढाई एकड़ ज़मीन पर बना हुआ है. इस बंगले की अनुमानित कीमत लगभग २६०३ करोड़ रुपये हैं. इसी बंगले में भारत पाकिस्तान के विभाजन की प्लानिंग की गयी थी.

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क्यूँ है यह बंगला खास

यह बंगला यानी जिन्ना हाउस काफी ख़ास है. इस बंगले का निर्माण यूरोपीय स्टाइल में किया गया है. इसका निर्माण १९३० के अंतिम दशक में मुंबई के समुद्र तट पर किया गया था. कहते हैं की १९३६ में मोहम्मद अली जिन्ना ने इस बंगले को २ लाख रुपये में खरीदा था. और इसे अपने हिसाब से तैयार करवाया था. इस बंगले के निर्माण में अखरोट की लकड़ी और इटली के संगमरमर को इस्तेमाल में लाया गया. यह बंगला इसलिए भी ख़ास है क्यूंकि इसी बंगले में जिन्ना ने जवाहर लाल नेहरु और महात्मा गाँधी से विभाजन को लेकर मीटिंग की थी. इस मुलाकात ने भारत से एक हिस्सा अलग कर दिया जिसे अब हम पाकिस्तान कहते हैं.

जिन्ना की बेटी ने किया था दावा

साल २००७ में मोहम्मद अली जिन्ना की बेटी दिना वाडिया ने मुंबई हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर बंगले के मालिकाना हक की मांग की थी. दिना के बेटे नुस्ली वाडिया मुंबई में ही रहते हैं और टेक्सटाइल तथा रीयल एस्टेट का काफी बड़ा कारोबार चलाते हैं.

शत्रु संपत्ति कानून के तहत कोई नहीं होगा दावेदार

भारत पाकिस्तान विभाजन के उपरान्त भारत ने ऐसी सभी चल-अचल संपत्ति को जब्त कर लिया था जिन्होंने पाकिस्तान जाने का निर्णय किया था और इस तरह की संपत्ति को विस्थापितों की संपत्ति घोषित किया गया था. लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह सुनिश्चित करवाया कि मोहम्मद अली जिन्ना या उनकी पुत्री को विस्थापित न लिखा जाए और न ही उनकी संपत्ति को विस्थापितों की संपत्ति के रूप में दर्ज किया जाए. लेकिन संसद में नए शत्रु संपत्ति कानून को पारित किया गया है जिसके तहत बंटवारे के वक्त पाकिस्तान  गए लोगों के वंशजों का उस संपत्ति पर कोई दावा नहीं रहेगा, जो उनके परिवारों ने भारत में छोड़ी थी.

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पाक खरीदना चाहता है जिन्ना हाउस

यह बगला कई दशक तक ब्रिटेन के डिप्टी हाईकमिश्नर का आवास भी रहा है, लेकिन १९८२ के बाद से यह लगभग बंद पड़ा है. हालाँकि पाकिस्तान सरकार इस बंगले को खरीदना चाहती है.  हाल में पाकिस्तान ने भारत से बंगले में अपना काउंसलर  कार्यालय बनाने का आग्रह किया था लेकिन भारत ने इनकार कर दिया. फिलहाल तो बंगला बंद पड़ा है अब देखना यह है की इस वीरान पड़े जिन्ना हाउस में चिराग कब रोशन होंगे.

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