वैज्ञानिकों ने भी माना 2000 साल पहले ही बन चुका था सुपर कम्प्यूटर

computer, कॉम्पुटर उपयोग, कॉम्पुटर जानकारी, कॉम्पुटर का महत्व, वैज्ञानिक के नाम, कॉम्पुटर शिक्षा, computer ka upyog, सुपर कॉम्पुटर, कंप्यूटर का इतिहास, वैज्ञानिक के बारे मे, भारत के वैज्ञानिक, वैज्ञानिक खोज, वैज्ञानिक, से पहले

भविष्य की नींव हमेशा ही इतिहास पर रखी जाती है। रामायण काल में प्राचीन पद्धती से बने ‘पुष्पक विमान’ के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने 2000 साल पहले बने सुपर कम्प्यूटर के बारे सुना है?सुनने में ये थोड़ा अजीब लगे, लेकिन ये हकीकत है कि 2000 साल पहले भी सुपर कम्प्यूटर था और इस बात की पुष्टी वैज्ञानिक भी कर चुके हैं। आज हम आपको बताएंगे उस महान् खोज के बारे में जिसे 2000 साल बनाया गया था।

कम्प्यूटर एक महान् आविष्कार

पहले मशीन को चलाने के लिए इंसानों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब लगता है कि इंसान को चलने के लिए अपने हर काम के लिए मशीन की जरूरत पड़ती है। आविष्कार के क्रम में सबसे महान् खोज माना जाता है ‘कम्प्यूटर’। भविष्य ही नहीं वर्तमान की कल्पना भी बगैर कम्प्यूटर के नहीं की जा सकती।  वैसे तो आए दिन नए-नए कंप्यूटर्स का आविष्कार होता रहता है। अगर आज की बात करें तो दुनिया का नंबर एक सुपर कंप्यूटर चीन द्वारा बनाया गया ‘सनवे तायहूलाइट’ है।

2000 साल पहले बना सुपर कम्प्यूटर

कम्प्यूटर आधुनिक युग की एक महान् देन है, लेकिन क्या आप ये बात मान सकते हैं कि कम्प्यूटर का आविष्कार 2000 साल पहले ही हो चुका है और भी ‘सुपर कम्प्यूटर’ का? भले ही लोगों के जीवन में बेहद सहज और प्राथमिक बन चुके कंप्यूटर को आधुनिकतम तकनीक की एक महान् खोज माना जाता है, लेकिन आपको बता दें कि आज से 2000 साल पहले भी कंप्यूटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था और वैज्ञानिकों ने भी इस बात को माना है।

ये भी पढ़ें :

आइए, आपको सैर कराते हैं जुड़वां बच्चों की नगरी की

यूनानी सुपर कंप्यूटर

दरअसल वर्ष 1900 में यूनानी द्वीप ‘एंटीकायथेरा’ से पाए गए एक उपकरण को शोधार्थियों(Researchers) ने डिकोड किया जिसे ‘यूनानी सुपर कंप्यूटर’ माना जा रहा है। आपको बता दें इस मशीन का शोध एक अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थियों की टीम द्वारा किया जा रहा है।

इस मशीन के बारे में रिसर्चर्स का कहना है कि डिकोड के शुरुआती चरण से जो नतीजे निकले वे चौंकाने वाले हैं। उनका मानना है कि शायद यूनानी इसका प्रयोग भविष्य जानने के लिए भी किया करते थे। फिलहाल इसके पहले चरण की ही डिकोडिंग हुई है। डिकोडिंग के दूसरे चरण में कई और राज खोले जा सकते हैं।

आखिर क्या है एंटीकायथेरा मैकेनिज्म

इस सुपर कंप्यूटर को वैज्ञानिकों ने नाम दिया ‘एंटीकायथेरा मैकेनिज्म’। अगर इसके बारे में बात करें तो ‘एंटीकायथेरा मैकेनिज्म’ नाम से प्रसिद्ध यह सुपर कंप्यूटर प्राचीन यूनानियों के लिए सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की चाल का चार्ट तैयार करने में मदद करता था। ये इतना उन्नत किस्म का था कि ग्रहों की सटीक गणना कर सकता था।

इससे जानते थे ग्रहों की स्थिति

इस सुपर कम्प्यूटर के बारे में शोधार्थियों का मानना है कि करीब 60 से 200 ईसा पूर्व यूनानी वैज्ञानिकों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता था। इस कंप्यूटर में कांसे से बने यंत्र एक क्रम से लगाए गए हैं। वैज्ञानिकों की माने तो इससे ग्रहों की भविष्यवाणी समेत सूर्य, चंद्रमा और तारों की गणना की जाती थी। इतना ही नहीं पांच ग्रहों मंगल, बृहस्पति, बुध, शुक्र, और शनि की स्थिति को भी ट्रैक किया जाता था। इन सबसे आप इसकी उन्नत किस्म का अंदाजा लगा सकते हैं।

एक बड़ी खोज है ये सुपर कंप्यूटर

इस कंप्यूटर को 1900 में यूनानी द्वीप ‘एंटीकायथेरा’ में गोताखोरों ने एक जहाज़ से पाया इसलिए इसका नाम भी उन्होंने इस द्वीप के नाम पर ‘एंटीकायथेरा’ रखा। दरअसल ये जहाज़ पूरी तरह से तबाह हो चुका था, लेकिन कंप्यूटर जीर्ण-क्षीर्ण अवस्था में बचा हुआ था। 100 सालों से भी ज्यादा समय तक यह वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना रहा। लेकिन अब इसके कुछ हिस्सों को वैज्ञानिकों ने डिकोड करने का दावा किया है।

शोधकर्ताओं ने ऐसे किया डिकोड

शोधकर्ताओं के दल ने सबसे पहले कंप्यूटर के आंतरिक तंत्र का अध्ययन किया। आधुनिक एक्स-रे मशीन और नवीनतम इमेजिंग तकनीक द्वारा स्कैन किए गए, जिसके बाद पता चला कि  इस कम्प्यूटर के 82 अलग-अलग टुकड़े हैं। जिन पर यूनानी भाषा में खगोलीय लेख या कोड लिखे गए हैं, लेकिन इन्हें अभी पूरी तरह से डिकोड नहीं किया जा सका है।

आपके लिए एक और बेहतरीन कहानी :-

ट्रैक्टर बनाने वाले ने फेरारी को टक्कर देने के लिए बना डाली थी लेम्बोर्गिनी कार

डिकोड करना मुश्किल

आपको बता दें इसके कोड सिर्फ़ 1.2 मिमी में लिखे गए हैं। जिन्हें आंखों से नहीं पढ़ा जा सकता। इसके लिए अब सूक्ष्मदर्शी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। काफी कोशिश के बाद भी इसे पूरी तरह नहीं खोला जा सका, दरअसल इसे खोलना काफी मुश्किल काम है। लेकिन अब इसके लिए दूसरी तकनीकों पर ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि अभी तक यह पता नहीं चला है कि मशीन द्वारा किस प्रकार खगोलीय गणना की जाती थी। ये किस प्रकार कार्य करता था ये अभी जान पाना मुश्किल है।

Source: Inquisitr

Leave a Reply