छोटा सा गांव जो देखते ही देखते बन गया एशिया का सबसे अमीर गांव

कुछ समय पहले हमने भारत के एक ऐसे गांव की कहानी पोस्ट की थी, जो एशिया का सबसे साफ़ सुथरा गांव था। इसी कड़ी में अब लाए हैं भारत के अरबपति गांव की कहानी, जो अब अरबों की कमाई की वजह से बन गया है एशिया का सबसे अमीर गांव। भारत को गांवो और कस्बो का देश कहा जाता है ,भारत का नाम आते ही सबसे पहले नजरो के सामने खेतो से भरी हुई जमीन और छोटे छोटे घर का नजारा सामने आता है , पर यह सिर्फ हमारी एक कल्पना ही नहीं बल्कि यह सत्य भी है क्योकि भारत में लगभग गांवो के हालात उतने ठीक नहीं , जहां एक आम आदमी अपनी ज़िंदगी ठीक तरीके से व्यतीत कर सके। आज भी गाँवों में ठीक तरीके से बिजली , पानी , परिवहन , शिक्षा के अभाव से लोगो को  बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है , जिसकी वजह से वह पिछड़ा ही रहता है। लेकिन अगर आपको कोई कहे कि ऐसा गांव जहां रहने वाले लोगो की तनख्वा एक  शहर में रहने वाले लोगो से कहीं ज्यादा हो तो , आप जरूर यह सुनकर हसेंगे लेकिन यह सत्य है। दरअसल हम जिस गांव बारे के में आपको बताने जा रहे है वह एशिया का सबसे अमीर गांव है। जी हां सही सुना आपने। यह गांव देखने में बिलकुल एक साधारण सा है लेकिन यहां रहने वाले लोग अपनी ज़िंदगी ऐशो आराम से बिताते है। आइये आपको बताते है इस गांव के बारे में।

गांव के अमीर बनने का कारण

दरअसल हम जिस गांव के बारे में आपको बता रहे है वह हिमाचल प्रदेश में स्थित है जो ‘मड़ावग’ नाम से जाना जाता है।  हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को पूरी दुनिया उसकी प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से जानती है। लेकिन अब इस शहर को एक और नई पहचान मिल गई है। इस नयी पहचान का कारण है यहां होने वाले सेबो का व्यापार।  शिमला के सेब देश-विदेश में खूब पसंद किए जाते हैं। शिमला जिले की चौपाल तहसील के ‘मड़ागव’ में लोगों की कमाई का एकमात्र जरिया खेती ही है। यहां लोग अपना सारा जीवन बस सेबो की खेती पर ही ध्यान देते है। सेबो की खेती से होने वाली कमाई इतनी अधिक होती है कि इन्हे किसी और काम की तरफ जाना ही नहीं पड़ती। शिमला के इस छोटे से गांव के सेब विदेशो में भी भारी मात्रा में निर्यात किये जाते है।

गांव के लोगो की कमाई

शिमला का यह गांव ज्यादा बड़ा नहीं है न क्षेत्र के हिसाब से और न जनसँख्या के हिसाब से। इस गांव में रहने वाले लोगो की जनसंख्या लगभग 2000 है और यही 2 हजार लोग लगभग 1.5 अरब कमाते हैं। दरअसल मड़ावग में मुख्यतौर पर आपको सभी जगह पर सेब के बाग ही मिलेंगे। लेकिन बागो के साथ साथ अब  आपको यहां आलीशान मकान भी देखने को मिल जायेंगे। जिसकी वजह है सेब की कमाई से होने वाली अरबों रूपए की कमाई। गांव के सेब ज्यादातर विदेश में निर्यात होते हैं, जिनसे गांव के लोगों को जबरदस्त कमाई होती है। और लोग अपनी ज़िंदगी सुख चैन से बिताते है उन्हें किसी शेर में जाकर काम करने की कोई जरुरत नहीं पड़ती है।

तकनीक में भी बहुत आगे है यह गांव

खेती करने के लिए एक आम किसान किसी ज़मीन पर ज्यादा से ज्यादा खाद डलवाकर या उसमे उर्वरको की मात्रा मिलाकर खेती करता है ताकि उसकी फसल अच्छी हो , लेकिन शिमला का यह गांव जिस तरह कमाई में सबसे आगे है उसी तरह तकनीक में भी सबसे आगे है। दरअसल, मड़ावग गांव में लोग नई नई  तकनीक से सेब की खेती करते हैं। वो इंटरनेट के जरिए देश-विदेश से सेब से संबंधित सभी जानकारी जुटाते रहते हैं। बाजार का भाव जानकर वो अपने सेबों को बेचते हैं। तकनीक का सहारा लेकर वो समय समय पर अपनी फसल में जरूरी बदलाव करते रहते हैं। सेब की खेती दो तरीके से होती है, एक तो ऑन इयर प्रोडक्शन और दूसरी ऑफ इयर प्रोडक्शन। मड़ावग में सेब की खेती ऑन इयर प्रोडक्शन से होता है।

पहले कोई ओर गांव था सबसे अमीर

सेबो की खेती क मामले में गुजरात भी काम नहीं था। एक समय था जब पुरे भारत में क्या बल्कि दुनिया भर में गुजरात के माधवपुर के सेबो का व्यापार किज्या जाता था। लेकिन आज के समय में  मड़ावग ने प्रति व्यक्ति आय के मामले में गुजरात को भी पीछे छोड़ दिया है। इस गांव से पहले गुजरात का माधवपर ही एशिया का सबसे अमीर गांव रह चुका है। शिमला जिले का एक और गांव क्यारी भी 1982 में एशिया का सबसे अमीर गांव रह चुका है वहा भी सेब की खेती होती थी।

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