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आखिर क्यों माना जाता है हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र

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Written by Rahul Ashiwal

आज हम आपको जरा हटके कुछ अलग किस्सा सुनाने जा रहे है , जो है हिन्दू धर्म के पवित्र पशु के ऊपर। हर एक धर्म की अपनी अपनी कुछ मान्यताएं होती है ,कोई किसी तरीके से अपने धर्म के प्रति कार्य करता है तो कोई किसी तरीके से। हिंदू धर्म में गाय को एक पवित्र पशु का दर्जा दिया गया है। हिन्दू धर्म में गाय को गाय माता माना जाता है ,क्या आपने कभी इस चीज पर गौर किया है कि आखिर क्यों गाय को हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र पशु माना जाता है ? नहीं ना , आज हम आपको गाय से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्यों के बारे में बताएँगे जिनसे आपको अपने सवालों के जवाब खुद मिल जाएंगे। आइये बात करते है इस बारे में।

आखिर क्या है गाय को पवित्र मानने का कारण ?

दरअसल, भारत एक कृषि-प्रधान देश है। कृषि ही भारत की आय का मुख्य स्रोत है। ऐसी अवस्था में किसान को ही भारत की रीढ़ की हड्डी समझा जाना चाहिए और गाय किसान की सबसे अच्छी साथी है। गाय के बिना किसान व भारतीय कृषि अधूरी है। एक खेत में जितनी मेहनत एक किसान करता उससे कहीं ज्यादा गाय। प्राचीन भारत में गाय समृद्धि का प्रतीक  मानी जाती थी। युद्ध के दौरान स्वर्ण, आभूषणों  के साथ गायों को भी लूट लिया जाता था। जिस राज्य में जितनी गाएं होती थीं उसको उतना ही संपन्न माना जाता है। किंतु वर्तमान परिस्थितियों में किसान व गाय दोनों की स्थिति हमारे भारतीय समाज में दयनीय है। इसके दुष्परिणाम भी झेलने पड़ रहे हैं। एक समय वह भी था, जब भारतीय किसान कृषि के क्षेत्र में पूरे विश्व  में सर्वोपरि था। इसका कारण केवल गाय थी। भारतीय गाय के गोबर से बनी खाद ही कृषि के लिए सबसे उपयुक्त साधन थे। खेती के लिए भारतीय गाय का गोबर अमृत समान माना जाता है । यही कारण है कि जिसकी वजह से गाय को एक पवित्र पशु का दरजा मिला।

सकारात्मक ऊर्जा का भंडार

वैज्ञानिक शोधों  से पता चला है कि गाय में जितनी सकारात्मक ऊर्जा होती है उतनी किसी अन्य प्राणी में नहीं। माना जाता है कि इतनी ऊर्जा सिर्फ  किसी संत में ही हो सकती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन  ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है, ‍जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते और कार्बन डाई ऑक्साइड  छोड़ते हैं। पेड़-पौधे इसका ठीक उल्टा करते हैं। माना जाता है कि घर के आसपास गाय के होने का मतलब है कि आप सभी तरह के संकटों से दूर रहकर सुख और समृद्धिपूर्वक जीवन जी रहे हैं। गाय के पास जाने से ही संक्रामक रोग कफ, सर्दी, खांसी, जुकाम का नाश हो जाता है। गाय का दूध व घी अमृत के समान है, वहीं दही हमारे पाचन तंत्र (digestion system) को सेहतमंद बनाए रखने में बहुत ही कारगर सिद्ध होता है, साथ ही दही  के सैकड़ों फायदे हैं।

गायों की प्रमुख नस्लें

गायो की सबसे ज्यादा नस्ल भारत में ही पायी जाती है। भारत में आजकल गाय की प्रमुख 28 नस्लें पाई जाती हैं। गायों की यूं तो कई नस्लें होती हैं, लेकिन भारत में मुख्‍यत: साहीवाल (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार), गिर (दक्षिण काठियावाड़), थारपारकर (जोधपुर, जैसलमेर, कच्छ), करन फ्राइ (राजस्थान) आदि हैं। विदेशी नस्ल में जर्सी गाय सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। यह गाय दूध भी ‍अधिक देती है। गाय कई रंगों जैसे सफेद, काला, लाल, बादामी तथा चितकबरी होती है। भारतीय गाय छोटी होती है, जबकि विदेशी गाय का शरीर थोड़ा भारी होता है।

आँखों में देखने पर झलकती है निर्दोषिता

गाय सबसे ज्यादा निर्दोष और डरा हुआ सा पशु होता है। आप यदि गौर से किसी गाय या बैल की आंखों में देखेंगे , तो आपको उसकी निर्दोषता अलग ही नजर आएगी। आपको उसमें देवी या देवता के होने का आभास होगा। यदि कोई व्यक्ति गाय का मांस खाता है तो यह निश्‍चित जान लें कि उसे रेंगने वालों कीड़ों की योनि में जन्म लेना ही होगा। यह शास्त्रोक्त तथ्‍य है। यदि कुछ या ज्यादा लोग ऐसा पाप करते हैं तो उन्हें फिर से 84 लाख योनियों के क्रम-विकास में यात्रा  करना होगी जिसके चलते नई आत्माओं को मनुष्य योनि में आने का मौका मिलता रहता है। मानव योनि बड़ी मुश्किल से मिलती है।

इन सब बातो को पढ़कर आपको शायद पता लग ही गया होगा कि हिन्दू धर्म में गाय का क्या महत्व है। गाय हिन्दु्ओं के लिए सबसे पवित्र पशु है। इस धरती पर पहले गायों की कुछ ही प्रजातियां होती थीं। उससे भी प्रारंभिक काल में एक ही प्रजाति थी। आज से लगभग 9,500 वर्ष पूर्व गुरु वशिष्ठ ने गाय के कुल का विस्तार किया और उन्होंने गाय की नई प्रजातियों को भी बनाया, तब गाय की 8 या 10 नस्लें ही थीं जिनका नाम कामधेनु, कपिला, देवनी, नंदनी, भौमा आदि था। कामधेनु के लिए गुरु वशिष्ठ से विश्वामित्र सहित कई अन्य राजाओं ने कई बार युद्ध किया, लेकिन उन्होंने कामधेनु गाय को किसी को भी नहीं दिया। गाय के इस झगड़े में गुरु वशिष्ठ के 100 पुत्र मारे गए थे।

उस समयकाल में गाय जैसे पशु को बचाने के झगड़े में इतनी जान गयी लेकिन आज के समय में गाय को मारने वालो की संख्या बहुत अधिक हो गयी है।

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