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ऐसा गांव जहां एक परिवार के सभी भाई एक युवती से करते हैं शादी

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Written by Rahul Ashiwal

शादी को लेकर हर किसी के अपने अलग अलग सपने होते है जिसके चलते किसी भी व्यक्ति का पूरा जीवन उसी पर निर्भर करता है। चाहे लड़का हो या लड़की सब चाहते है जिससे उसकी शादी हो वह उसके साथ ख़ुशी से रह सके। हमारे देश में शादी को लेकर कई प्रकार के रिवाज हैं और हर जाती और धर्म में उन रिवाजों का पालन भी होता है। लेकिन जरा सोच कर देखिये अगर एक ही लड़की की शादी किसी एक परिवार में रहने वाले सभी भाइयो से हो तो ? सुनकर आप दुविधा में जरूर पड़ जायेंगे लेकिन यह सच है भारत का ऐसा गांव जहा एक महिला की शादी किसी दूसरे परिवार में रहने वाले सभी भाइयो के साथ होती है। हर गांव, शहर में एक नई प्रथा देखने को मिल ही जाती है। जिस गांव के बारे में आज हम आपको बतायंगे वह भारत देश के एक राज्य हिमाचल प्रदेश में  स्थित है जहां शादी का सबसे अलग ही रिवाज़ है। देखा जाए तो  हिमाचल प्रदेश की हर प्रथा निराली है। आइये बात करते है इस गांव की प्रथा के बारे में।

आज भी किये जाते है बहुपति विवाह

जहां पूरी दुनिया में शादी के नाम पर एक लड़का और एक लड़की साथ मिलकर अपने जीवन की नयी शुरआत करते है , वही दूसरी और हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में आज भी दुनिया से जरा हटके बहुपति विवाह किए जाते हैं। एक ऐसा विवाह जहां रहने वाले परिवारों में महिलाओं के एक नहीं बल्कि कई पति होते हैं। ऐसा नहीं है, कि यह पति अलग-अलग परिवारों के होते है महिला के पति एक ही परिवार के घर के होते हैं।  घर की एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवार के लिए सभी भाई एक युवती से परंपरा के अनुसार शादी करते हैं और विवाहित जीवन जीते हैं।अगर किसी महिला के पति में से किसी एक पति की मृत्यु हो जाती है तो भी महिला को दुःख नहीं मानाने दिया जाता। शादी के बाद का विवाहित जीवन ‘एक टोपी’ पर निर्भर करता है।

आखिर क्यों किया जाता है बहुपति विवाह ?

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले  में शादी को लेकर यह अलग रिवाज बहुत सदियों पुराना है। यहां सभी भाई एक साथ मिलकर एक लड़की से शादी इसलिए करते हैं क्योकि ऐसा कहां जाता है, कि पांडव ही ऐसे भाई थे, जिन्होंने मिलकर एक महिला से शादी की थी।  इसके बाद ऐसा कहीं और सुनने को नहीं मिला। महाभारत काल के दौरान किन्नौर जिले में पांडवों ने सर्दियों के दौरान एक गुफा में पत्नी द्रौपदी और माँ कुंती के साथ अज्ञातवास के कुछ समय बिताए थे और जिस तरह द्रोपदी ने पांच पांडवो से शादी की थी उसी तरह से इसका संबंध आज भी यहां देखने को मिलता है। इस प्रथा को यहां की भाषा में घोटुल प्रथा कहते हैं।

सभी मिलकर पूर्ण रूप से निभाते है परंपरा

मान लीजिये कि, जैसे किस परिवार में पांच भाई हैं और सभी का विवाह एक ही महिला से किया गया है। शादी के बाद अगर कोई भी भाई अपनी पत्नी के साथ कमरे में है तो वे कमरे के दरवाजे बंद कर अपनी टोपी बाहर रख देता है। भाइयों में मान मर्यादा कितनी रहती है की जब तक टोपी कमरे के दरवाजे पर रखी है। कोई भी दूसरा भाई अंदर नहीं घुसता है। किन्नौर में विवाह की परंपरा भी अजीब ढंग से निभाई जाती है। जब किसी युवती की शादी होती है, लड़की के परिवार वाले लड़के के परिवार के बारे में पूरी जानकारी लेते हैं। विवाह में सभी भाई के दूल्हे के रुप में सम्मिलित होते हैं।

महिला बनती है घर का मुखिया

यहां की एक खास बात यह है कि यहां पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं घर का मुखिया होती है। इनका काम होता है पति व् संतानों की सही ढंग से देखभाल करना। परिवार की सबसे बड़ी स्त्री को गोयने कहा जाता है। उसके सबसे बड़े पति को गोर्तेस कहते हैं। इसका मतलब है, घर का स्वामी। यहां की एक और खास बात है, वो यह कि यहां खाने के साथ शराब अनिवार्य होती है। यदि पुरुषों का मन दुखी होता है, तो वह शराब और तम्बाकू का सेवन करते हैं। जबकि महिलाओं को किसी बात को लेकर दुख होता है तो वह गीत गाती है।

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