आखिर क्यों तानाशाह हिटलर ने करवाया 60 लाख से भी अधिक यहूदियों का नरसंहार

  • जर्मन सेना में एक मामूली कार्पोरोल बना दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह

  • हिटलर ने करवाया 60 लाख से अधिक यहूदियों का नरसंहार

  • औरतों को अधिक से अधिक बच्चा पैदा करने के लिए दिया जाता था मेडल

  • यहूदियों एवं अन्य नीच/निम्न नस्ल के लोगों, को अनेक तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा

  • यहूदी नाजी जर्मन के सबसे ज्यादा शिकार रहे

दुनिया अभी तक दो विश्व युद्ध झेल चुकी है और इनके घाव इतने गहरे हैं कि ये अभी तक भरे नहीं हैं। कई देश इन युद्धों के कारण इतने पीछड गए की अभी तक पूरी तरह से संभल नहीं पाए हैं। लेकिन क्यों हुए ये युद्ध? क्या था इन विश्व युद्धों के शुरू होने का कारण? और क्या हुए इनके परिणाम….आज के अफसाने में पता करेंगे विश्व युद्ध के बारे में और जर्मनी में नाजीवाद के उदय से लेकर हिटलर की तानाशाही के बारे में

आधुनिक इतिहास की बात करें तो जब जर्मनी का एक आधुनिक सशक्त राष्ट्र के रूप में उदय हुआ तब तक सम्पूर्ण विश्व यूरोप के साम्राज्यवादी राष्ट्रों के बीच में बंट चुका था| ये बात किसी से भी छिपी नहीं है कि यूरोप में इस साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप ही प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) हुआ| साम्राज्यवाद की राह पर चलते हुए जर्मनी अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आस्ट्रियन साम्राज्य तथा इटली एवं जापान के साथ मिलकर मित्र राष्ट्रों – इंग्लैण्ड, फ्रांस, रूस, अमेरिका, के विरुद्ध हुए युद्ध में शामिल हुआ और यहीं से शुरूआत हुई प्रथम विश्व युद्ध की।

विस्तारवादी सोच को लेकर आगे चलते हुए जर्मनी को हालांकि इस युद्ध में प्रारम्भिक सफलता मिली और उसने फ्रांस व बेल्जियम के कुछ भागों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया| लेकिन अंत में अमेरिका के युद्ध में शामिल होने के बाद (1917 में) मित्र राष्ट्रों की विजय हुई और 1918 ई. में प्रथम विश्व युद्ध का अंत हुआ और इसके घातक परिणाम हुए।

अगर बात करे जर्मनी की तो युद्ध में पराजय के बाद जर्मनी में वीमर (Weimer) नामक जगह पर एक राष्ट्रीय सभा का आयोजन हुआ| इस सभा के परिणाम स्वरूप जर्मनी में एक लोकतांत्रिक एवं संघीय सरकार की स्थापना हुई| जर्मनी का संविधान एक लोकतांत्रिक संविधान था, लेकिन इसमें आपातकालीन प्रावधान भी था, जिसके अंतर्गत एक लोकतांत्रिक सरकार के स्थान पर आधिनायकवादी शासन की स्थापना की जा सकती थी|

जर्मनी को किया गया कमजोर

एक तरफ जहां जर्मनी में सरकार बन रही थी वहीं दूसरी तरफ जर्मनी के अधिकांश नागरिक युद्ध के बाद की वर्साय की संधि से न केवल असंतुष्ट थे बल्कि इसकी शर्तों से अपमानित भी महसूस कर रहे थे| इस संधि के चलते जर्मनी को न केवल अपना उपनिवेश छोड़ना पडा, बल्कि इसकी भौगोलिक सीमाओं में भी व्यापक परिवर्तन किया गया, मानो जर्मनी को पूरी तरह तोड़ दिया गया| इतना ही नहीं इसके कुछ भागों को सैन्य रहित घोषित कर दिया गया ताकि सैन्य शक्ति के रूप से यह कमजोर रहे| इसे आर्थिक रूप से भी कमजोर बनाने के लिए युद्ध का दोषी ठहराकर उसे हर्जाने के रूप में 6 बिलयन पौंड देने के लिए मजबूर किया गया| मानो इस संधि के बाद जर्मनी की रीढ़ की हड्डी ही टुट गई थी। पूरी-पूरी कोशिश की गई की जर्मनी अपने पैरों पर फिर से खड़ा ना हो पाए।

लेकिन नियती को तो कुछ और ही मंजूर था। इन सभी परिस्थितियों के बीच 1919 में जर्मनी में हिटलर ‘जर्मन वर्कर्स पार्ट’ में शामिल हुआ और कुछ ही वर्षों में इसका सर्वे सर्वा बन गया| हिटलर जर्मनी को फिर से खड़ा करना चहता था और इसके लिए उसे जरूरत थी सता की। इसके लिए हिटलर ने इटली की मुसोलिनी की विचारधारा एवं पार्टी संगठन के आधार पर ही इस पार्टी का पुनर्संगठन किया| यह पार्टी अब ‘नेशनलिस्ट सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी’ के नाम से पुनर्निर्मित हुई जो बाद में ‘नाजी’ पार्टी के नाम से प्रचलित हुई| पार्टी की विचारधारा ही बाद में जर्मनी में नाजीवादी विचारधारा बनी| जर्मनी में अब समय था नाजीवाद का और दुनिया को मिलने वाला था सबसे बड़ा तानाशाह।

नाजी जर्मनी का तानाशाह हिटलर इतना क्रुर था की दो विश्व युद्धों के बीच के दौर में दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह था| इतना ही नहीं उसकी राष्ट्रवाद का विस्तार और यहूदियों के प्रति नफरत पर आधारित द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होने की सबसे बड़ी वजह और व्यापक नरसंहार होने की प्रमुख वजह बनी|

हिटलर का जर्मनी की सत्ता में आगमन

हिटलर के बारे में बात करे तो, आपको बता दें उसने अपना जीवन जर्मन सेना में एक मामूली कार्पोरोल के स्तर से शुरू किया| प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी को मिली पराजय और मित्र राष्ट्रों के हाथों वर्साय जैसी अपमानजनक संधि से वह आहत था, वह जर्मनी को फिर से ताकतवर बनता देखना चाहता था| 1919 में वह जर्मन वर्कर्स पार्टी का सदस्य बना और 1921 में उसे पार्टी का नेता चुना गया| 1933 में वह जर्मनी का चांसलर बना और अगले साले उसने खुद को जर्मनी का सर्वोच्च नेता-फ्युरर घोषित किया| इस तरह एक मामूली सा कोर्पोरोल जर्मनी का सर्वेसर्वा बन गया।

अपनी महत्वकांक्षाओं का पूर्ती के लिए वर्ष 1923 में हिटलर ने सत्ता नियंत्रण करने के लिए असफल प्रयास किया| उसे गिरफ्तार कर सजा भी दी गई, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया| शुरूआती दौर में तो नाजी पार्टी को जर्मनी में कोई विशेष सफलता नहीं मिली, लेकिन 1929 की विश्व आर्थिक मंदी से जर्मनी की आर्थिक व्यवस्था और भी चरमरा गई| जर्मनी के सामान्य नागरिक का, जो कि नए वीमार गणतंत्र को वैसे ही संदेह की दृष्टि से देखते थे, लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास उठ गया, वो अब बदलाव चाहते थे| आर्थिक मंदी के दौरान लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली से उनका भरोसा और भी ख़त्म हो गया| अब समय था हिटलर का।

जर्मनी में नाजीवाद का उदय

हिटलर अपने मकसद में लगा हुआ था। साथ ही हिटलर और नाजीपार्टी की प्रोपेगांडा (प्रचार-प्रसार) से लोग हिटलर की विचारधारा के प्रति आकर्षित हुए| उन्हें इस पार्टी के माध्यम से एक बेहतर भविष्य का अवसर दिखा| यह नाजी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता में भी दिखाई देती है| सबको लगा की हिटलर उन्हें फिर सम्मान दिला सकता है। 1928 में जर्मन संसद – रीचस्टेग – में जहां इस पार्टी को केवल 2.6% वोट मिले वहीं 1932 में नाजी पार्टी को 37% वोट मिला और यह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई| अब वक्त था हुकूमत करवने का।

ये बात अभी तक सिद्ध हो चुकी थी के एक अच्छे नेता के सात-साथ हिटलर एक प्रभावशाली वक्ता भी था| उसने न सिर्फ एक अच्छे और सशक्त जर्मनी को बनाने का वादा किया| बल्कि वर्साय की संधि का बदला लेकर जर्मनी के गौरव को पुन: स्थापित करने का भी वचन दिया| साथ ही उसने सभी बेरोजगारों के लिए काम एवं युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के निर्माण की भी बात की| उसका प्रचार प्रसार इतना प्रभावशाली था की पूरी जर्मनी में उसी की बाते होने लगी।

हिटलर की तानाशाही शुरू हो चुकी थी

नाजी पार्टी का वर्चस्व कायम हो चुका था। 30 जनवरी 1933 को जर्मन राष्ट्रपति हिंडेनबर्ग ने हिटलर को मंत्रिपरिषद का सर्वोच्च चांसलर बनाया| तत्पश्चात हिटलर ने जर्मन के लोकतांत्रिक ढांचों को एक-एक कर विघटित करना शुरू किया| 1934 में संदेहास्पद ढंग से जर्मन संसद भवन में आग लगी| परिणामस्वरूप हिटलर ने वीमर गणतंत्र द्वारा स्थापित प्रेस एवं अभिव्यक्ति की आजादी, नए संगठन बनाने एवं एकत्रित होने की आजादी को ख़त्म कर दिया। कहा जा सकता है कि हिटलर की तानाशाही शुरू हो चुकी थी, क्योंकि सता अब उसके हाथ में थी| हिटलर ने अब और भी आक्रामक रूप से अपने प्रमुख विरोधी साम्यवादियों (communists) को प्रताड़ित करना शुरू किया| उन्हें बड़ी संख्या में गिरफ्तार कर यातना गृह (concentration camp) भेजा जाने लगा| अब जो भी हिटलर का विरोध करता सका यही हस्र होता।

इतना ही नहीं हिटलर ने 3 मार्च 1933 को इनेबलिंग एक्ट पास करवाया जिससे सभी सत्ता हिटलर के हाथ में केन्द्रित हो गई| जर्मनी में अधिनायकवादी शासन की स्थापना हुई| सभी विरोधी पार्टियों को, सिर्फ नाजी पार्टी को छोड़कर, गैरकानूनी घोषित कर, बंद कर दिया गया| अर्थव्यवस्था, मीडिया, सेना एवं न्यायव्यवस्था सभी पर राज्य का सम्पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया| अब सारी ताकत सिमट कर हिटलर के हाथों में आ गई थी।

यहूदियों के लिए जर्मनी नर्क बन चुका था

अब जर्मनी में अगर किसी की सरकार नहीं हुकूमत थी तो वो बस हिटलर की। 1934 तक आते आते हिटलर जर्मनी के सर्वोच्च नेता के रूप में स्थापित हो चुका था। अपनी सर्वोच्चता को स्थापित करने के बाद हिटलर ने प्रमुख रूप से दो तरह के कार्यक्रम को बढ़ाया| जिनमें पहला, जर्मनी के अन्दर एक श्रेष्ठ (superior), ‘शुद्ध’ (pure) आर्यन नस्ल की स्थापना एवं विकास करने के लिए उसने कई तरह के नियमों को लागू किया| विशेष रूप से यहूदियों एवं अन्य नीच/निम्न नस्ल के लोगों, को अनेक तरह से प्रताड़ित किया जाता था। यहूदी नाजी जर्मन के सबसे ज्यादा शिकार रहे। यहूदियों के लिए जर्मनी नर्क बन चुका था।

हिटलर की क्रुरता यहीं नहीं रूकी एक अनुमान के तहत विभिन्न यातना गृहों में क्रमबद्ध ढंग से 6 मिलियन(लाख) से भी अधिक यहूदियों का नरसंहार किया गया| इतना ही नहीं नाजीवाद ने जर्मनी को नस्लीय रूप से शुद्ध करने के लिए जर्मनी में एक नए तरह के मातृत्व (motherhood) के विचार का प्रचार प्रसार किया| इसके लिए औरतों का काम सिर्फ घर तक ही सीमित रखा गया उनका कर्तव्य माना गया कि वे यहूदियों से दूरी बनाके रखें | नस्लीय शुद्धता को बचाने के लिए बच्चों में नाजी गुणों को विकसित करें| हिटलर की तानाशाही अपनी चरम सीमा पर थी।

औरतों को बना दिया बच्चा पैदा करने की मशीन

यहां तक की हिटलर ने 1933 में घोषणा भी की कि “मेरे राज्य में सबसे प्रमुख नागरिक हैं औरत” | परन्तु नाजी जर्मनी में सभी औरतों का समान आदर नहीं होता था| जो औरतें अपंग अथवा अवांछित बच्चे पैदा करती थीं उनको प्रताड़ित किया जाता था| वहीँ सुडौल बच्चे पैदा करने पर पुरस्कृत भी किया जाता था| इतना ही नहीं औरतों को अधिक से अधिक बच्चा पैदा करने के लिए मेडल दिया जाता था| चार बच्चे पैदा करने पर ताम्र मेडल छ: बच्चे पर कांस्य मेडल और आठ या उससे अधिक बच्चे होने पर स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता था| देखा जाय तो वहां औरतों को बच्चा पैदा करने की मशीन बना दिया गया।

दूसरा कार्य हिटलर ने अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने ‘एक लोग, एक साम्राज्य और एक नेता’ के तहत अनेक छोटे-छोटे राष्ट्रों को जर्मनी में मिलाना शुरू किया जो अंतत: यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध का एक प्रमुख कारण बना| नाजी जर्मन का जर्मन राष्ट्रवाद, यहूदियों के खिलाफ नफ़रत व राज्य और संघर्ष से संबंधित विचार हिटलर की आत्मकथा मैन कॉम्फ (Mein Kamf) अथवा मेरा संघर्ष में निहित है| हिटलर की तानाशाही एक बार फिर जर्मनी को गर्त में ले गई।

 

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