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तो इसलिए अमेरिका के मुकाबले भारत है बढ़िया देश

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Written by Rahul Ashiwal

संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज पुरे विश्व भर में अमेरिका देश को एक बहुत बड़ी ताक़त के रूप में आँका जाता है , एक ऐसा देश जो हर तरीके से विकसित हो चूका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है अमेरिका जितना सक्षम है उतना ही इस देश में व्यापार से लेकर क़ानून, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवा एक आम आदमी के लिए प्राप्त करना कितना चुनौतीपूर्ण है।

अमेरिका में रहने वाले कुछ लोग ऐसे भी है जो अमेरिका में रहकर भी अपना व्यवसाय, अपनी शिक्षा और सस्वास्थ्य सेवाओ के लिए दूसरे देशो की तरफ रुख करते है। अमेरिका में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अपनायी जाती है। अमेरिका महँगा तो है यह कहना गलत नही हैं। भारत और अमेरिका की तुलना में भारत ऐसा देश है जहां के अधिकतर लोग सरकारी सुविधाओ पर निर्भर रहते है फिर चाहे बात शिक्षा की हो या स्वास्थय की। आइये आपको बताते है अमेरिका के बारे में कुछ ऐसी बाते जिन्हें पढ़कर आप यही कहेंगे कि भारत से बढ़िया देश कोई नहीं।

1.हथियार बेचने का खुला व्यापार


भारत में जहां एक आम आदमी को हथियार जैसे राइफल ,माउजर ,पिस्तौल रखने पर कड़े पाबन्द है वही अमरीका में ऐसा कुछ नही है अमेरिका में ये चीजे सुपरमार्केट में खुले में ऐसे बिकती हैं जैसे किसी दूकान पर दूध ,बिस्कुट आदि। आकड़ो के अनुसार पिछले 10 सालों में भारत में जितने लोग आतंकवाद से नहीं मरे, उससे ज्यादा लोग अमेरिका में बंदूक के चलते मारे गए। दिवाली के पटाखों की ही तरह वहां हथियारों की बिक्री होती है।

2 . शिक्षा के लिए अधिक पैसो की आवयश्कता

अमेरिका में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए औसतन खर्च लगभग 21 लाख रुपए है। इस कारण अमेरिकी छात्रों को बड़े-बड़े कर्ज लेने पड़ते हैं। एक मध्यम वर्ग या उससे नीचे का व्यक्ति इतनी बड़ी रकम का इंतजाम जल्दी से नही कर पाता। इसके बाद वहां की ब्याज दरें भी 6.5% से ज्यादा है। मगर इससे भी ज्यादा अफसोस की बात यह कि अगर आप अमेरिका में बड़े बैंकर हैं और आप फेल हो जाते हैं, तो आपको बेलआउट पैकेज मिल जाएगा। मगर स्टूडेंट्स के लिए लोन की कोई माफी नहीं है। अगर आपने मेहनत कर कॉलेज में एडमिशन ले भी लिया, तो लोन चुकाने के लिए आपको कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। भारत में एजुकेशन आज भी सब्सिडाइज्ड है और ज्यादा महंगी भी नहीं।

3 . स्वास्थ्य सुविधा के महँगे और बुरे हालात

देखा जाए तो आज भी बहुत से लोग बीमार होने पर सरकारी अस्पतालों या डिस्पेंसरी का रूख करते हैं। मुफ्त चेकअप और सस्ती दवाईयों के कारण गरीब लोगों को सामान्य रोग में दिक्कत नहीं होती। शायद ही किसी अस्पताल ने किसी का इलाज करने से मना सिर्फ इसलिए किया हो कि उसके पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं। वही दूसरीओर अमेरिका में मेडिकल इंश्योरेंस न सस्ता है और न ही किफायती। ‘जन-धन योजना’ जैसी कोई स्कीम अमेरिका में सोची भी नहीं जाती। अमेरिका में इलाज की कीमत का अंदाजा इस बात से भी हो जाता है कि अमेरिकी लोग भारत में आकर, इलाज करवा कर, घूम फिरकर भी पैसा बचा लेते हैं।

4 . टैक्स की कमाई का पैसा दूसरे देशो को कर्जे देकर लुटाना

अमेरिका ने बैंको को संकट से उबारने के लिए $600 बिलियन यानि ₹40 लाख करोड़ का बेल आउट पैकेज दिया। भारत में 2G से कुल ₹1.7 लाख करोड़ की कमाई हुई थी। यह सारा टैक्सदाताओं की कमाई का पैसा था। इससे भी मजेदार बात यह है कि करदाता को मालूम ही नहीं कि उनका पैसा कहां गया क्योंकि अमेरिका में ऐसा कोई नियम नहीं कि कंपनी अपना खर्च का ब्यौरा बताए। इस सब के बाद भी बेलआउट के पैसों से टॉप अधिकारों को बड़े-बड़े बोनस मिले, जिनकी वजह से बैंक दिवालिया होने के कगार पर आए। भारत में इस कदर का स्काम चुपचाप होना बहुत ही मुश्किल है।

5. चुनावों मे सिर्फ दो उम्मीदवार


अमेरिकी लोगों के पास चुनावों में सिर्फ दो ही ऑप्शन रहते हैं – डेमोक्रेटिव या रिपब्लिकन पार्टी। इसके अलावा उनके पास कोई और विकल्प ही नहीं। विकल्प न होने के कारण अमेरिकी जनता बंधी रह जाती है। दूसरी तरफ भारत की ओर नजर डाले तो यहां बीजू जनता दल, एआईडीएमके, समाजवादी पार्टी, टीडीपी, तृणमूल कांग्रेस सफलता के बहुत बड़े उदाहरण हैं। इस बात को पूरी दुनिया मानती है कि अधिक विकल्पों से परफॉर्मेंस बेहतर होती है।

6 . युद्धनीति

अमेरिका की विदेशनीति समझ के परे है। शीत युद्ध में शांत रहने के बाद से ही अमेरिका ने हर दशक में 1-2 युद्ध जरूर देखे हैं। कुछ ‘महाज्ञानी’ मानते थे कि फलां देश के पास परमाणु हथियार हैं, इसलिए अमेरिका ने उन देशों पर धावा बोल दिया। इस वजह से हजारों अमेरिकी सैनिका मारे गए। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अब तक अमेरिका ने करीब 4 लाख सैनिक गंवाए हैं। अमेरिका अब भी अफगानिस्तान में अपने सैनिक भेज रहा है। न सिर्फ मानव संसाधन, बल्कि अमेरिका अपना पैसा भी इस तरह खूब बर्बाद कर रहा है। वहीं भारत की विदेशनीति और कूटनीखुलेआम ति उसके सैनिकों को युद्ध में नहीं धकेलती। बड़े देशों में देखा जाए तो भारत सबसे कम युद्ध लड़ता है। इसके बाद भी भारत अपनी सुरक्षा बेहद शानदार तरीक से करता है। बेवजह युद्ध करना भारत की नीति नहीं।

7. कैदियों की अधिकतम संख्या

अमेरिका के कानून सख्त भी हैं और कड़ाई से लागू भी हैं। अगर लोग यह सोचते हैं कि इस कारण वहां जुर्म की दर बहुत कम होगी, ऐसा बिलकुल नही है। अमेरिका में अपराध बहुत ज्यादा है। इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि कैद की दर प्रति 1 लाख लोगों में 716 है, जो विश्व में सबसे ज्यादा है। भारत में यह दर प्रति 1 लाख लोगों पर 33 ही है। इसका मतलब यह नहीं कि भारत में जुर्म कम है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका में कैद की अवधि बहुत ज्यादा है।

8. बिज़नस शुरू करना एक कठिन कार्य

माना जाता है कि अमेरिका के मुकाबले भारत में बिजनेस करना ज्यादा आसान है और देखा जाए तो यह एक तरीके से सही भी है। भारत में बिजनेस की बात करते टाइम हम लाइसेंस, परमिशन आदि की बात तो करते हैं जैसे अमेरिका में यह सब कुछ हो ही नहीं। कई अमेरिका ग्रेजुएट्स भारत में आकर बिजनेस कर रहे हैं। इसके अलावा चीन में भी अमेरिकी जा रहे हैं। इसके अलावा सिर्फ महंगी लेबर ही नहीं, बल्कि बिजनेस शुरू करने की दिक्कतों कारण भी आउटसोर्सिंग ज्यादा होती है।

9. त्योंहारों का व्यवसायीकरण


अगर आप सोचते हैं कि अमेरिका में क्रिसमस और न्यू ईयर के अलावा कोई त्योंहार ही नहीं, तो आप गलत है। ब्लैक फ्राइडे, ब्लैक थर्सडे, साइबर मंडे, थैंक्सगिविंग, वेलेनटाइन वीक जैसे तमाम त्योंहारो पर कंपनियों की लूट पसरी रहती है। वहीं भारत में ऐसा नहीं है। पहले तो त्योंहार भगवान से संबंध रखते हैं। गणेश पूजा, दही हांडी जैसे कई त्योंहार सामूहिक रूप से कम खर्च में मनाए जाते हैं। दूसरा, भारत में दिवाली पर पटाखों और होली पर रंग-गुब्बारों की सेल में गिरावट आई है।

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