Motivation

एक असुर ऐसा जिसकी अच्छाइयां भी देती हैं हमें प्रेरणा

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Written by Shweta Singh

राम मंदिर का मुद्दा ज़ोरों पर है , ऐसे में मुझे भगवान राम की कुछ प्रेरणादायक बातें आपसे साझा करनी चाहिए थी. लेकिन ज़रा सोचिये जिसके पांडित्य के भगवान राम भी कायल हो गए आखिर उस रावण में कुछ गुण तो होंगे न. तो चलिए आज हम रावण की कुछ प्रेरणादायक बातें आपको बताते हैं.

शिव तांडव स्त्रोतम का रचनाकार

वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता था अर्थात उनके पुत्र विश्रवा का पुत्र था। रावण एक ब्राह्मण पुत्र था . रावण भगवान् शिव का परम भक्त था और उसने ही शिव तांडव स्त्रोतम की रचना की थी.

पांडित्य से भरपूर

रावण पूरी तरह से ब्राह्मण नहीं था क्योंकि रावण की माता कैकसी असुरों के कुल से थी लेकिन रावण में पांडित्य भरपूर था और वो घोर तपस्वी भी रहा था, रावण ने अपनी कठोर तपस्या से ही ब्रह्मा जी से दैवीय शक्तियां हासिल की थी. वाल्मीकि उसके गुणों को निष्पक्षता के साथ स्वीकार करते हुये उसे चारों वेदों का विश्वविख्यात ज्ञाता और महान विद्वान बताते हैं. इतना ही नहीं वे अपने रामायण में लिखते हैं “रावण को देखते ही राम मुग्ध हो जाते हैं और कहते हैं कि रूप, सौन्दर्य, धैर्य, कान्ति तथा सर्व लक्षणयुक्त होने पर भी यदि इस रावण में अधर्म बलवान न होता तो यह देवलोक का भी स्वामी बन जाता.”

मर्यादित पुरुष

रावण जहाँ दुष्ट था वहीं उसमें शिष्टाचार और ऊँचे आदर्श वाली मर्यादायें भी थीं. राम के वियोग में दुःखी सीता से रावण ने कहा है, “हे सीते! यदि तुम मेरे प्रति काम भाव नहीं रखती तो मैं तुझे स्पर्श नहीं कर सकता.” शास्त्रों के अनुसार वन्ध्या, रजस्वला, अकामा आदि स्त्री को स्पर्श करने का निषेध है अतः अपने प्रति अकामा सीता को स्पर्श न करके रावण मर्यादा का ही आचरण करता है.

रावण संहिता का रचयिता

रावण बहुत ही ज्ञानी था वो वेदशास्त्र और ज्योतिषशास्त्र में काफी निपुण था. ने खगोलविज्ञान और ज्योतिषविज्ञान में महारथ हासिल की थी. साथ ही वह तंत्र का भी ज्ञाता था. अपने ज्ञान को उसने रावण संहिता में संरक्षित किया था, जिसके सिद्धांतों को आज भी माना जाता है. रावण के पुत्र मेघनाद के जन्म के समय रावण ने सूर्य समेत सभी ग्रहों को अपने अपने स्थान पर ही रहने का आदेश दिया था जिससे उस लग्न के कारण उसका बेटा अमर रहे हालाँकि शनि ने अपना स्थान बदल लिया और ऐसा नहीं हो पाया.

चतुर राजनीतिज्ञ और कुशल रणनीतिकार

रावण एक बेहद चालाक राजनीतिज्ञ होने  के साथ साथ नीति शास्त्र में भी कुशल था यहाँ तक की भगवान राम ने रावण के अंतिम समय में लक्ष्मण को रावण से नीतिशास्त्र और कूटनीति का ज्ञान लेने को भी कहा था. अपनी तपस्या के लिए विख्यात रावण ने भगवान ब्रह्मा से यह वरदान भी लिया कि कोई भी देवता, दैत्य, असुर, गंधर्व या किन्नर उसका वध नहीं कर सकता. लेकिन रावण इस श्रेणी में मनुष्य को रखना भूल गया, जिसके कारण श्रीराम ने उसका वध किया.

इतनी सारी अच्छाईयां होने के बाद भी रावण को बुराई का प्रतीक क्यों माना गया. इसका मात्र एक ही कारण होई रावण का अहंकार. जी हाँ रावण को अहंकार था जिस वजह से उसने सीता हरण किया और वह युगों युगों तक बुराई का प्रतीक बनकर रह गया. 

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