१०१ साल की उम्र में भी हैं इनके हौंसले बुलंद

अगर हौंसले बुलंद हो तो चाहे ३ साल की बच्ची हो या सौ साल के बुज़ुर्ग अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए उन्हें कोई नहीं रोक सकता. ऐसी ही बुज़ुर्ग महिला से आज आपकी मुलाकात करते हैं.

 १०१ की उम्र में किया स्वर्ण पदक हासिल

वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में भारत की महिला धावक मन कौर ने १०१  साल की उम्र में परचम लहराते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है. जी हां, बिलकुल सही सुना आपने.  न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में आयोजित स्पर्धा में मन कौर ने १०० मीटर रेस में यह मेडल जीता है. मन कौर  ने अपने करियर में यह सत्रहवां गोल्ड मेडल हासिल किया है.

 १४ सेकंड्स में तय की दूरी

कौर ने एक मिनट चौदह सेकंड्स में यह दूरी तय की, जो उसेन बोल्ट के ६४.४२ सेकंड के रिकॉर्ड से कुछ सेकंड ही कम है. उसेन बोल्ट ने २००९ में सौ मीटर की रेस में यह रेकॉर्ड कायम किया था. मन कौर १०१ साल की बड़ी उम्र के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर काफी तेजी से बढ़ती दिखाई दीं.

१०० वर्ष की उम्र की अकेली धावक

पच्चीस हज़ार प्रतिभागियों वाली इस प्रतियोगिता में सौ या उससे अधिक उम्र की कैटिगिरी में मन कौर अकेली धावक थीं. न्यूजीलैंड मीडिया में  मन कौर को चंडीगढ़ का आश्चर्य कहा जा रहा है. मन कौर के मुताबिक इस प्रतियोगिता में भाग लेना उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य था. वह कहती हैं कि उन्होंने इस रेस को काफी एन्जॉय किया. वह आगे भी दौड़ना जारी रखना चाहती है. कौर ने आठ वर्ष पहले तिरानवे साल की उम्र में ऐथलेटिक्स में भागीदारी शुरू की थी.

क्या हैं आगे के प्लान

मन कौर को उनके बेटे गुरदेव सिंह ने इंटरनेशनल मास्टर्स सर्किट से जुडऩे का सुझाव दिया था. इससे पहले उनका खेलों को प्रति कोई अनुभव नहीं था. मेडिकल चेक-अप में ऑल क्लियर घोषित किए जाने के बाद कौर ने अपने बेटे के साथ अब तक दुनिया भर में एक दर्जन के करीब प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है. अपने मेडलों की संख्या को बीस तक पहुंचाने के लिए मन कौर ऑकलैंड में दो सौ मीटर रेस, दो किलोग्राम गोला फेंक और चार सौ ग्राम भाल फेंक स्पर्धा में भी हिस्सा लेना चाहती हैं.

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