खाने का ही नहीं इनकी जीभ जाने रंगों का स्वाद भी

जीभ किसके काम आती है??? आप कहेंगे भोजन का स्वाद लेने के काम. लेकिन अगर हम आपको यह बताएं कि जीभ पेंटिंग बनाने के भी काम आती है…. चौंकिए मत दुनिया का ऐसा एक कलाकार है जो अपनी जीभ से तसवीरें बनता है.

चीन का है युवक

चीन का युवक हान शिओमिंग अपनी कलाकारी से लोगों के बीच एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. जीभ से पेंटिंग करने की कला उसे अपने परिवार से मिली है. उसके परिवार में उसके दादाजी भी जीभ से ही पेंटिंग करते थे. सबसे बड़ी बात ये है कि वो पहले अपनी जीभ को इंक में डिप करता है फिर पेंटिंग बनाता है.

३० मिनट में पूरी करते हैं पेंटिंग

अपनी किसी भी पेंटिंग को हान शिओमिंग लगभग तीस मिनट में बनाकर पूरी कर लेता है. जीभ से पेंटिंग बनाने की कला उसके परिवार में सदियों से चली आ रही है. हान शिओमिंग ने एक इंटरव्यू में बताया कि जीभ से पेंटिंग करने की कला चीन में खत्म हो गई है लेकिन उसने अभी भी जारी रखा है.

अपनी पीढ़ी के हैं चौथे कलाकार

सत्ताईस साल का ये युवक अपनी पीढ़ी का चौथा ऐसा कलाकार है जिसने जीभ से पेंटिंग करने की कला अपनाई है.हालांकि कुछ लोग उसे ऐसा काम करने के लिए मना करते हैं क्योंकि इंक शरीर के लिए हानिकारक  होता है, लेकिन फिर भी उसने अपनी कला को नहीं छोड़ा.

इस कला को बचा के रखना चाहते हैं

हान शिओमिंग के अनुसार, ‘मैं लोगों को जीभ से पेंटिंग करने सीखा सकता हूं लेकिन अपनी पेंटिंग बनाने की कला को बेच नहीं सकता’. उनका कहना है, ये कला पारंपरिक है जो पीढ़ीयों तक चलेगी.

भारत में भी है ऐसा ही एक कलाकार

केरल के अनिल वरनम भी अपनी जीभ को पेंट ब्रश की तरह इस्तेमाल करके तस्वीरें बनाते हैं. अनिल अब तक हज़ारों पेंटिंग बना चुके हैं. जीभ से चित्र बनाने में आने वाली दिक़्क़तों के बारे में अनिल कहते हैं, “जीभ एक संवेदनशील अंग है इसलिए इसे ब्रश की तरह इस्तेमाल करना ज़्यादा मुश्किल काम नहीं हैं.”

आँखों में होती है दिक्कत

अनिल कहते हैं, “दिक़्क़त आँखों को होती है जो कैनवास से मात्र दो इंच की दूरी पर ही रहती हैं. मेरी आँखों में दर्द हो जाता है. दर्द से बचने के लिए मैं एक आँख बंद करके रखता हूँ ताकि ज़्यादा ज़ोर न पड़े.”

‘द लास्ट सपर’

अनिल की अब तक की सबसे बड़ी पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ आठ फुट की है. इसमें ईसा मसीह अपने शिष्यों को संदेश दे रहे हैं. इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि तस्वीर में दिख रहे हर चेहरे पर अलग भाव है. इसमें कुल तेरह चेहरे हैं. पेंट ब्रश के ज़रिए भी इतनी विविधता और रंगों से भरी तस्वीर बनाना मुश्किल काम है लेकिन अनिल वरनम ने इस काम को अपनी जीभ से अंजाम दिया है. अनिल ने कहा, “मैं अपनी कला में सबसे अलग होना चाहता था इसलिए मैंने अपनी जीभ से चित्रकारी करने का फ़ैसला लिया.”

छह साल का अभ्यास

अनिल बताते हैं कि जीभ से चित्रकला करने के क़ाबिल बनने के लिए उन्होंने बहुत अभ्यास किया है. छह साल तक अभ्यास करने के बाद वह जीभ से चित्र बनाने में सक्षम हुए हैं. ‘द लास्ट सपर’ पेंटिंग बनाने में अनिल को एक हफ़्ते से ज़्यादा का वक़्त लगा लेकिन एक रिकॉर्ड के लिए पाँच फीट लंबी पेंटिंग उन्होंने दो ही घंटों में ही बना दी.

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