Life

इसे कहते हैं असली जुगाड़

mm
Written by Shweta Singh

 

आपके यहां जब कुछ सामान बिगड़ जाता है या ख़राब हो जाता तो उसे या तो फेंक देते हैं या फिर कबाड़ में बेच देते हैं. लेकिन इस दुनिया में कुछ विरले ऐसे भी हैं जो इन्ही ख़राब सामान से जुगाड़ फिट कर कुछ नया इजाद करने का प्रयास करते हैं.

पटना में स्थित पॉवर कैफ़े

कबाड़ से जुगाड़ कर उपयोग की वस्तुएं बनाना वाकई काफी मुश्किल होता है. आज हम पटना की बात कर रहे है, जी हां, पटना में रंग-बिरंगी सी एक छोटी बिल्डिंग दिखाई देती है, जो सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती है. यह छोटी सी बिल्डिंग कुछ ओर नहीं बल्कि पॉवर कैफे है.

क्यों पड़ा इसका नाम पॉवर कैफ़े

दरसल इस बिल्डिंग में  रखा सारा सामान और फर्नीचर बिजली विभाग के खराब हो चुके सामान से बना है. इसलिए इसको पॉवर कैफ़े नाम दिया गया है. यह सभी लोगों को चीजों की रीसाइक्लिंग करने का सन्देश देती है. बिहार के चीफ इंजीनियर सरोज कुमार सिन्हा का कहना है कि इस बिल्डिंग को बनाने में मंजीत और नेहा सिंह का बहुत बड़ा योगदान है.

क्या है इस कैफ़े में ख़ास

  • कैफे में मौजूद हर वस्तु को काफी अच्छे से ढंग से तैयार किया गया है. इतनी ही नहीं, इसको बनाने के लिए पुरानी साइकिल के आधे हिस्से का प्रयोग किया गया है.
  • इस कैफे में बैठने के लिए कुर्सी और टेबल पुराने बेकार पड़े ड्रमों से बनाए गए है. साथ ही बेकार पड़े इलैक्ट्रिक पैनल्स से बेंच बनाए हुए है.
  • अगर डस्टबीन की बात करें तो उसको मॉडर्न लुक देने के लिए बिजली की पुरानी तारों का प्रयोग किया गया है.

तो देखा आपने कबाड़ और जुगाड़ से रीसाइक्लिंग कर आप पूरा का पूरा कैफ़े खड़ा कर सकते हैं.

About the author

mm

Shweta Singh

Leave a Comment