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अब हाथ की भी होगी पारखी नज़र  

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Written by Shweta Singh

अब वो समय चला गया जब किसी दुर्घटना में हाथ पांव कट जाने के बाद उन्हें किसी का मोहताज होना पड़ता था. कृत्रिम अंगों का इस्तेमाल कर सब अपनी ज़िन्दगी को सुचारू रूप से चला रहे हैं. इसका एक बहुत बड़ा उदहारण हैं अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन जिनका एक दुर्घटना में पैर कट गया था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज भी वह काफी मशहूर अभिनत्री के रूप में जानी जाती हैं.

लेकिन कृत्रिम अंगों की दुनिया में बहुत जल्‍द एक बड़ा बदलाव आने वाला है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आर्टिफिशियल हाथ तैयार किया है जो खुद देख-परख कर चीजों को अपने हिसाब से उठाएगा. पढ़कर अचम्भा हुआ होगा आपको. चलिए आपको पूरी खबर बताते हैं.

 

हाथ की भी होंगी आंखें

मेडिकल साइंस में नित नए बदलाव हो रहे हैं, आए दिन नई रिसर्च होती रहती है. इसी का नतीजा है कि अब कृत्रिम अंगों की बनावट भी कुछ अलग होने जा रही है. वैज्ञानिकों ने कृत्रिम हाथ बनाने का नया तरीका अपनाया है. इस हाथ की खास बात जानते हैं ??? यह हाथ खुद ब खुद चीजों को देख सकेगा और अपने हिसाब से चीजों को उठा सकेगा.

कैसे करेगा काम

इस हाथ में एक कैमरा लगा होगा जो किसी वस्‍तु की फोटो खींचकर उसे इलेक्‍ट्रानिक ब्रेन में भेज देगा. यह ब्रेन हाथ को मिली सेकेंड के अंदर निर्देश दे देगा कि वस्‍तु को किस तरह से उठाना है. वैज्ञानिकों ने इस कैमरे में करीब पांच सौ से ज्‍यादा वस्‍तुओं की सत्तर अलग-अलग तरीके के एंगल से फोटो खींचकर कैमरे की मेमोरी में फिट किया है. ऐसे में जब हाथ किसी वस्‍तु के सामने आता है तो वह तुरंत ही मेमोरी से संबंधित वस्‍तु की फोटो रिकॉल करके उसे उठाने का तरीका समझ लेता है. फिलहाल यह हाथ चार तरीके से वस्‍तु को उठाएगा. जैसे कि कप, रिमोट, सेब और पेन.

 

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

कृत्रिम अंगों के एक्‍सपर्ट डॉ किएनोश नजरेपोर ने कृत्रिम हाथ बनाने के नए तरीके की काफी सराहना की है. अभी तक डॉक्‍टर पुरानी बनावट वाले कृत्रिम अंगों का इस्‍तेमाल किया करते थे. लेकिन अब समय बदल चुका है. टेक्‍नोलॉजी के विकास के साथ ही मेडिकल जगत में भी नई-नई तकनीक का उपयोग हो रहा है. यह नया कृत्रिम हाथ चीजों को अपने हिसाब से उठाने में सक्षम होगा. जैसे कि पेंसिल से लेकर सेब या बोतल पकड़ने तक, हर चीजों को यह खुद समझकर उन्‍हें सही तरीके से उठा सकता है.

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