मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

कुछ कर दिखाने का हौसला हो और मन में जीत की जिद हो तो मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता. इसका उदाहरण है कक्षा दस का बालक तुहिन डे. आप सोच रहे हैं हम ऐसा क्यों ख रहे हैं. तो चलिए बताते हैं क्यों हैं यह १० वर्षीय बालक इतना खास.

क्यों है यह बालक खास

क्या आप जानते हैं कि तुहिन का अर्थ क्या है. तुहिन का मतलब बर्फ होता है और यह बालक अपने हौसले की बर्फ को पिघलने नहीं देता. दरअसल सेरीब्रल पाल्सी से ग्रस्त इस बालक के शरीर में ओर्थो ग्रिपोसिस मल्टीप्लेक्स कॉन्जीनेटा विकार है. इसके कारण उसकी मांसपेशियां इतनी कमजोर हैं कि वह शरीर का भार नहीं उठा सकती.. तुहिन न हाथ हिला सकता है और न अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. इसके बावजूद सामान्य विद्यार्थियों के साथ पढ़ता है, मोबाइल और कम्प्यूटर ऑपरेटर करता है. इरादा कहें या आदर्श, तुहिन विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिन्स की तरह खुद को विकसित करना चाहता है. एस्ट्रो फिजिक्स में रिसर्च करना चाहता है. वहां तक पहुंचने के लिए ही कोटा आया है. यहां ऐलन करियर इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने के बाद आईआईटी की पढ़ाई शुरू कर दी है. तुहिन ने कोटा आने का निर्णय इंटरनेट पर रिसर्च करके लिया है. माहेश्वरी ने तुहिन की प्रतिभा और जज्बे को देखते हुए पूरी तरह से उसका साथ देने की पहल की है. तुहिन को ऐलन में नि:शुल्क पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा तुहिन के बैठने के लिए स्पेशल टेबल भी तैयार की गई है, ताकि मुंह से आसानी से लिख सके.


दो बार नेशनल अवार्ड जीते

तुहिन सामान्य विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई करता है और खुद को साबित करता है. पिछली कक्षाओं में तुहिन हमेशा क्लास में अव्वल रहा. दसवीं का परिणाम आना अभी शेष है लेकिन उम्मीद है कि दस सीजीपीए प्राप्त करेगा. तुहिन की इसी प्रतिभा को देखते हुए पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने कई पुरस्कार दिए. इसके अलावा मानव संसाधन मंत्रालय ने वर्ष २०१२ में बेस्ट क्रिएटिव चाइल्ड अवार्ड तथा २०१३ में एक्सेप्शनल अचीवमेंट अवार्ड दिया गया. दोनों पुरस्कार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तुहिन को दिए.

नहीं लेता राइटर

हौसले का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तुहिन सामान्य विद्यार्थियों के साथ ही परीक्षा देता है. बोर्ड नियमों के अनुसार तुहिन चाहे तो राइटर लगा सकता है लेकिन तुहिन खुद मुंह में पैन दबाकर सवालों के जवाब देता है. यही नहीं कोशिश यह रहती है कि दिव्यांग होने के चलते मिलने वाले अतिरिक्त समय का भी उपयोग नहीं किया जाए. ज्यादातर परीक्षाएं सामान्य विद्यार्थियों के साथ ही पूरी कर लेता है. मुंह से ही मोबाइल ऑपरेट कर लेता है, मैसेज से चेटिंग कर लेता है. यही नहीं लैपटॉप भी मुंह से चला लेता है.

तुहिन का यह जज्बा उन बच्चों के लिए मिसाल है जो ज़रा ज़रा सी बात पर हताश हो जाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं. तुहिन के इस जज्बे को हम सलाम करते हैं और कामना करते हैं वो आगे इसी तरह तरक्की करते जायें.

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