Adventure

चलिए आपको बादलों की सैर करते हैं 

mm
Written by Shweta Singh

ज़रा सोचिये… आप लोग ट्रेन में सफ़र कर रहे हैं… ट्रेन छुक छुक करती हुई अपनी गति से चली जा रही है….कभी किसी बड़े ब्रिज से होकर गुज़र रही है , कभी किसी टनल से गुज़र रही है तो कभी पहाड़ों और मैदानी इलाकों के मनोरम दृश्य दिखाकर आपके मन को सुकून दे रही है. तभी अचानक…आपकी ट्रेन अचानक बादलों को चीरती हुई आगे गुज़रती है…अरे… क्या हुआ चौंक  क्यों गए आप लोग? कहीं यह तो नहीं सोच रहे की धरती से आकाश की सैर करा रही है यह ट्रेन…या मैं आपको कल्पनालोक में ले आई हूं.

अरे भई ये मजाक नहीं बिल्कुल सच है और इस दुनिया में एक ऐसी जगह जहां ऐसा नज़ारा देखने को मिल  सकता है.

अर्जेंटीना में है यह जगह

सच साबित करने वाला ये नजारा आपको अर्जेंटीना में देखने को मिल सकता है. जहां पर गुजरने वाली ट्रेन बादलों के बीच से होकर गुजरती है. अर्जेंटीना में समुद्र तल से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर एंडीज पर्वत श्रृंखला से घिरी हुई एक जगह है जहां से ट्रेन होकर गुजरती है.

ये भी पढ़ें-अब ट्रेन भी होगी इनविजिबल 

ट्रेन टू द क्लाउड नाम क्यों पड़ा

चारों ओर बादलों से ढका होने के कारण लोग इस ट्रेन को ‘ट्रेन टू द क्लाउड’ के नाम से जानते हैं. यह दुनिया की सबसे ऊंचे रेल रूटों में से एक है. जब यह ट्रेन ऊंची ऊंची पहाड़ियों से गुजरती है तो उस समय देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह बादलों को चीरते हुए आगे की ओर बढ़ रही है. दरअसल होता ये है कि जब रेलवे लाइन के दोनों ओर भारी बादल होते हैं तो ये बादल ट्रेन को पूरी तरह से ढक लेते है. जिससे देखरकर ऐसा लगता है कि ट्रेन बादलों के बीच में से होकर चल रही हो.

कब हुआ था इस रेल मार्ग का निर्माण

इस रेलमार्ग का निर्माण १९२० में अमेरिका के इंजीनियर रिचर्ड फोन्टेन मरे के द्वारा किया गया था. इसकी शुरुआत अर्जेंटीना की ‘सिटी ऑफ साल्टा’ से की गई थी. यह ट्रेन सोलह घंटे में २१७ किलोमीटर  का सफर तय करती है. यह ट्रेन ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से होकर गुजरते हुए करीब तीन हज़ार मीटर का सफर तय करती है. जिसमें वो २९  पुल और २१ टनल को क्रॉस करते हुए आगे की ओर बढ़ती है.

तो क्या इरादा है आपका… करनी है बादलों की सैर ट्रेन टू द क्लाउड से…!!!

About the author

mm

Shweta Singh

Leave a Comment