इस गांव के हर घर में है खिलाड़ी खेल

हमारे भारत वर्ष का असली जीवन गांव में ही देखने को मिलता है. देखने तो आज हम शहरीकरण में लिप्त हो चुके हैं लेकिन अगर सुकून की बात होती है तो हम सब अपने अपने गांव की ओर ही रुख करते हैं. वैसे तो आजकल हमें गांव से शहर की ओर पलायन की खबरें मिलती रहती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे भारतवर्ष में एक गांव ऐसा है जिसने देश में ही नहीं विदेश में भी अपने नाम का डंका बजाया है.

छत्तीसगढ़ का है यह गांव

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला मुख्यालय से महज बारह किलोमीटर दूर पुरई, खेल गांव के रूप में मशहूर है. यहां से निकले खिलाड़ियों ने जिले के बाद प्रदेश और देश में भी गांव का नाम रोशन किया है. गांव का एक खिलाड़ी तो अंतर्राष्ट्रीय खो-खो मैच में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुका है.

खेलों की बदौलत मिली नौकरियां

खेलों की बदौलत यहां के करीब चालीस युवा पुलिस, सेना और व्यायाम शिक्षक की नौकरियों में हैं. सरपंच सुखित यादव ने बताया कि गांव के हर घर में अमूमन एक खिलाड़ी  है. उन्होंने कहा कि गांव में खुला मैदान तो था, लेकिन अभ्यास के दौरान वहां आने-जाने वालों की वजह से असुविधा होती थी और खेल में व्यवधान भी पड़ता था.

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गांव में बना मिनी स्टेडियम

खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने और उनका हुनर निखारने के लिए यहां ग्राम समग्र विकास योजना के तहत इकत्तीस लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम बनाया गया है. मिनी स्टेडियम बन जाने से खिलाड़ी अब अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकेंगे.

खेलों के कारण स्वच्छता के प्रति जागरूक

पुरई के सरपंच यादव बताते हैं कि खेलों के कारण गांव में लोग स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक हैं. इससे यहां स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों को भी अच्छी गति मिली है. खेलों के साथ ही यहां के अभिभावक शिक्षा और बच्चों के कौशल विकास को लेकर भी खासतौर से जागरुक हैं. यादव ने कहा कि करीब चार एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्टेडियम में अब अनेक खेल आयोजनों के साथ ही गांव के खिलाड़ी बिना किसी व्यवधान के अभ्यास कर सकेंगे.

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