यह सड़कें खुद ही भर लेंगी अपने गड्ढे  

हम भारतियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी क्या है… क्या कहा बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार… जी हां, यह तो है इसके अलावा… नहीं समझ आ रहा तो हम बताते हैं. सड़कों पर गड्ढे हम भारतीय ड्राइवर्स के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होते हैं. यूं तो सारी दुनिया की सड़कों पर गड्ढे बनते हैं, पर भारत में इनकी समस्या कुछ ज्यादा ही है. लेकिन अब परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. अब सड़कें खुद ही अपने गड्ढे भर लिया करेंगी. कैसे? आइये बताते हैं.

कैसे रखेगी सड़कें अपना ध्यान

नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने खुद को ठीक कर लेने वाली सड़कें बना ली हैं. यानी ये सड़कें गड्ढे और दरारें खुद भर लेती हैं. बस, इनके ऊपर इंडक्शन रोलर चलाना होता है. इतना ही नहीं यह डच वैज्ञानिक सड़कों को गड्ढा-मुक्त रखने के लिए बैक्टीरिया की मदद भी ले रहे हैं.

ये भी पढ़ें-अब गाड़ियां नहीं, सड़कें बजाएंगी हॉर्न

कोलतार की सड़कों में क्या है कमी

कोलतार यानी डामर की सड़कों पर बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं. यह कोलतार की खूबी है और उसकी कमी भी. छिद्रों की वजह से ऐसी सड़कें शोर और गर्मी तो सोख लेती हैं लेकिन दूसरी तरफ, इन्हीं छिद्रों के कारण उनमें दरारें और गड्ढे भी जल्दी पड़ते हैं.

सेल्फ हीलिंग डामर क्या है

न्यूजीलैंड स्थित डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी में एक्सपेरिमेंटल माइक्रो-मैकेनिक्स के प्रमुख, डॉ. एरिक श्लेन्जन सेल्फ-हीलिंग डामर पर प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंने स्टील फाइबर मिलाकर डामर की एक नई किस्म तैयार की है. यह कंडक्टिव (सुचालक) होती है.

कैसे होता है इसका प्रयोग

स्टील फाइबर मिश्रित डामर हालांकि सामान्य डामर से पच्चीस फ़ीसदी महंगा होता है, लेकिन लंबे समय में यह बहुत फायदेमंद है. डॉ. श्लेन्जन के अनुसार, सामान्य सड़कों की लाइफ जहां सात से आठ साल, वहीं सेल्फ हीलिंग डामर से बनी सड़कें दोगुना चलती हैं.

 

 

Leave a Reply