क्यों है थर्टी इयर्स वॉर यूरोपीय इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध 

 

मध्य यूरोप में एक युद्ध को थर्टी इयर्स वॉर के नाम से जाना जाता है. इसे यूरोपीय इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है, जिसकी वजह से कई लाख लोगों का जीवन प्रभावित हुआ था.

क्या है थर्टी इयर्स वॉर

सन् १६१८  से १६४८  तक कैथोलिकों और प्रोटेस्टेटो  के बीच युद्धों की जो परंपरा चली थी उसे ही साधारणतया तीस वर्षीय युद्ध (थर्टी इयर्स वॉर) कहा जाता है. इसका आरंभ बोहेमिया के राजसिंहासन पर पैलेटाइन के इलेक्टर फ्रेडरिक के दावे से हुआ और अंत वेस्टफे लिया की संधि से. धार्मिक युद्ध होते हुए भी इसमें राजनीतिक झगड़े उलझे हुए थे.

क्या था इस युद्ध के पीछे का कारण

इस युद्धश्रृंखला के अनेक कारणों में पहला औग्सब सम्मेलन के निर्णयों की दो त्रुटियां थी; जैसे उसमें धर्मसुधारक लूथर के अनुयायियों की धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार तो स्वीकृत किया गया, परंतु काल्विन के अनुयायियों का नहीं. फिर प्रोटेस्टेंट राजाओं को गिरजाघरों की भूमि अधिकृत करने से भी नहीं रोका गया. कैथोलिक पक्ष प्रबल था, अत: प्रोटेस्टेंट नरेशों ने संघटित होकर एक यूनियन की स्थापना की जिसके जवाब में तत्काल ही कैथोलिक राजाओं ने एक लीग की स्थापना कर दी जिसका नेता बवेरिया का ड्युक मैक्समिलियन था. हालांकि बोहेमिया हैप्सबर्ग साम्राज्य के अंतर्गत था, फिर भी वहां के प्रोटेस्टेंट बहुत शक्तिशाली थे. उन्होंने एक संधि द्वारा सम्राट् से बड़े विशेषाधिकार प्राप्त किए थे परंतु उस संधि का पालन न कर सरकार द्वारा दो प्रोटेस्टेंट गिरजे गिरा दिए गए. फलत: सन् १६१८ में प्राग में बलवा हो गया और क्रुद्ध बोहेमियन नेताओं ने सम्राट् के दो प्रतिनिधियों को बंदी बनाकर उन्हें खिड़की से बाहर फेंक दिया और साथ ही हैप्सबर्ग की अधीनता का त्याग कर उन्होने पैलेटाइन के इलेक्टर फ्रेडरिक को अपना राजा बना लिया जो प्रोटेस्टेंट यूनियन का प्रधान ओर इंग्लैड के राजा प्रथम जेम्स का दामाद था. इसपर सम्राट् फार्डिनेंड द्वितीय ने कैथोलिक लीग से सहायता की याचना की. अपने सहधर्मी प्रोटस्टेटों के रक्षार्थ उत्तरी जर्मनी पर आक्रमण कर दिया परंतु दो बार बुरी तरह पराजित होकर सन १६२८ में युद्ध से विरत हो गया. इस विजय से उत्साहित होकर सम्राट् ने औग्सवर्ग की संधि द्वारा दिए गए इलाकों की पुन:प्राप्ति और लूथर मत के सिवा सभी अन्य उपसंप्रदाय को तोड़ देने की आज्ञा प्रचारित की. बोहेमिया का एक क्रूर सरदार वालेंस्टाइन, जिसे सम्राट् ने अपनी स्वतंत्र सेना संघटित करने का अनुमित दी थी, इस समय बहुत प्रबल हो गया था. अपने अत्याचारों के कारण वह सेनापति पद से हटा दिया गया. फलत: कैथोलिक सैन्यबल क्षीण हो गया और इस स्थिति का लाभ उठाकर स्वीडेन नरेश गस्तबस अडाल्फस स्वयं प्रोटेस्टेंट होने के धार्मिक और राज ्यविस्तार के राजनीतिक कारणों से युद्ध में शामिल हो गया, परंतु उत्तरी जर्मनी के प्रोटेस्टेट राजाओं ने उसे तब तक कोई महत्व न दिया जब तक कैथोलिक सेना ने क्रूर सेनापति टिली के नेतृत्व में उत्तरी जर्मनी के प्रधान नगर मागडेवर्ग का विनाश नहीं कर दिया. गस्तवस टिली की ओर चला और लाइपजिग के समीप दोनों में मुठभेड़ हुई. कैथोलिक सेना बुरी तरह पराजित हुई. राइन तट पर जाड़ा बिताने के बाद वसंत में गस्तवस बवेरिया में घुसा और टिली को पुन: पराजित कर म्युनिख पर अधिकार कर लिया. टिली घायल होकर मर गया. अब सम्राट् ने वालेंस्टाइन को गस्तवस से उसका सामना हुआ. जीत गस्तवस की ही हुई पर वह स्वयं मारा गया. वालेस्टाइन ने रीशूल तथा जर्मनी के प्रोटेस्टेंट राजाओं से गुप्त संधि कर ली जिसपर वह भी मारा गया. यह युद्ध यहीं समाप्त हो जाता परंतु सन् 1635 में रीशलू ने स्पेन के विरुद्ध युद्ध घोषणा कर दी. स्वीडेन ने सम्राट् को पुन: हराया.

४०० साल पहले हुए इस युद्ध के खुलासे

४०० साल पहले हुए इस युद्ध के बारे में अब जाकर साइंटिस्ट्स ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. २०११  में जर्मनी के लुत्जेन में आर्कियोलॉजिस्ट्स को बहुत बड़ा कब्रिस्तान मिला था, जिसमें कई लोगों की बॉडीज एक साथ दफनाई गई थी. इनमें से ४७ बॉडीज की जांच करने के बाद ये बात सामने आई है कि ज्यादातर सिपाहियों की मौत बंदूक से चली गोली की वजह से हुई थी. कुछ कंकालों के ऊपर धारदार हथियार से हमले के भी निशान थे, लेकिन ४७ में से २१ कंकाल के सिर में गोली के निशान मिले तो ११ में बुलेट फंसे हुए ही थे.

४०० साल पूर्व कहां से यई बंदूकें
चौंकाने वाली बात ये हैं कि आज से चौर सौ साल पहले इतने सारे लोगों को मारने के लिए बंदूक आए कहां से होंगे? उस दौर में बंदूक मिलते तो थे, लेकिन इतनी भारी मात्रा में लोगों को मारने के लिए कई बंदूकों की जरूरत हुई होगी, जो उस समय मुश्किल था.

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युद्ध में मारे गए लोगों को यूं ही कर दिया था दफन
४०० साल बाद मिले इन कंकालों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सारी बॉडीज को यूं ही दफन कर दिया गया था. रिसर्च में ये भी बात सामने आई कि दफनाने से पहले इन सैनिकों के यूनिफॉर्म भी उतार दिए गए थे. रिसर्च के बाद जारी रिपोर्ट में साइंटिस्ट्स ने इस बात का भी जिक्र किया है कि इनमें से ज्यादातर सैनिक स्वीडिश आर्मी की तरफ से लड़ रहे थे.

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