क्यों निकाली जाती है यहां जिंदा महिलाओं की शव यात्रा

शव यात्राएं आपने आक्सर देखी होंगी लेकिन एक जगह एससी है जहां जिंदा महिओं की शव यात्रा निकाली जाती है. जी हां, हम बात कर रहे है मध्य प्रदेश के मंडला जिले की. मंडला से लगे जुनवानी गांव में जीवित महिला की शव यात्रा निकाली जाती है.

क्या है इसके पीछे का रहस्य

जल ही जीवन है’ यानी बिना पानी के जीवन संभव नहीं है. सभी को मानसून का इंतजार रहता है. यदि समय पर बारिश नहीं होती है तो मौसम विभाग भी गई तरह की भविष्यवाणी करता है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इंद्रदेव या मेघों को प्रसन्न करने के लिए कई परंपराओं को निभाया जाता है. इन्हीं में शामिल एक ऐसी अजीब परम्परा जिसमें जीवित महिला की शव यात्रा निकाली जाती है. ऐसा माना जाता है कि यह टोटका करने से भगवान इंद्र जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और बारिश अच्छी होती है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

जुनवानी ग्राम के रहने वाले रामबरन आदिवासी बताते हैं कि जब भी मानसून समय पर नहीं आता है, गांव में पंचायत बुलायी जाती है. पंचायत में महिला की शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया जाता है. बारिश विलम्ब हुआ तो इस बार भी यही टोटका आजमाया जाएगा. रामबरन के अनुसार यह परम्परा जुनवानी नहीं आसपास के कई गांवों में सदियों से प्रचलित है.

और भी मान्यताएं हैं प्रचलित

  • रामबरन के अनुसार रतलाम में मान्यता है कि यदि किन्नर नृत्य साधना करें तो इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं. इसी प्रकार वहां बारिश के लिए जिंदा महिला की शवयात्रा निकाली जाती है.

  • सिहोरा और कटनी के आस-पास के क्षेत्रों में भी अनोखी परंपरा अदा की जाती है. इस परम्परा के तहत गांवों में छोटे बच्चों द्वारा मूसल में मेंढक बांधकर उसे घर-घर घुमाया जाता है. इसके बाद उस पर पानी मारकर अच्छी बारिश की कामना की जाती है. कटनी के आसपास के गांवों के साथ बैतूल, मुलताई आदि क्षेत्रों में आज भी ये परम्पराएं कायम हैं.

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